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UP : घोसी विधायक सुधाकर सिंह का निधन, अखिलेश यादव ने जताया दुख

Lucknow :  समाजवादी पार्टी के तेजतर्रार, बेबाक नेता और घोसी सीट से सपा विधायक सुधाकर सिंह का गुरुवार सुबह लखनऊ के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया. 58 वर्षीय सुधाकर लंबे समय से लीवर और किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. दिल्ली में माफिया मुख्तार अंसारी के परिवार से मुलाकात कर वापस लौटने के दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दो दिन बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. 

 

सपा ने सुधाकर सिंह के निधन पर शोक जताया

सुधाकर सिंह के निधन की खबर से सपा खेमे में शोक की लहर दौड़ गई है. पार्टी ने उनके निधन पर शोक जताया है. सपा ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि घोसी विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह जी का निधन अत्यंत दुःखद है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें. शोक संतप्त परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो. भावभीनी श्रद्धांजलि. 

 

अखिलेश यादव ने सुधाकर सिंह के निधन को सपा परिवार की अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि सुधाकर भाई सिर्फ नेता नहीं, हमारे परिवार का हिस्सा थे. सुधाकर सिंह का पार्थिव शरीर आज शाम घोसी लाया जाएगा. अंतिम संस्कार कल सुबह किया जाएगा.

 

 

 

 

तीखे तेवर और मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते थे सुधाकर

सुधाकर सिंह अपने तीखे तेवर और जनता के बीच मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते थे. राजनीति और व्यक्तित्व दोनों ही मामलों में वे बेहद मुखर और जमीन से जुड़े नेता माने जाते थे. सुधाकर सिंह मधुबन विधानसभा से एक बार और घोसी से दो बार विधायक चुने गए थे. तीन बार के सपा विधायक रहे सुधाकर पर जनता की आवाज उठाने के दौरान दर्जनों बार मुकदमे दर्ज हुए और वे कई बार जेल भी गए. उनके समर्थक इसे ‘संघर्ष का बैज’ कहते थे.

 

मुलायम सिंह ने टिकट काटा तो निर्दलीय चुनाव लड़े थे सुधाकर

2017 के विधानसभा चुनाव में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उनका टिकट काट दिया था. इससे नाराज होकर उन्होंने पार्टी से बगावत की और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए. बाद में अखिलेश और मुलायम खेमे में सुलह होने के बाद सुधाकर सिंह फिर सपा में लौट आए. 

 

2023 उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत

2022 में दारा सिंह चौहान के सपा से इस्तीफा देने के बाद घोसी में 2023 का उपचुनाव बेहद हाई-प्रोफाइल हो गया था. भाजपा ने अपनी पूरी ताकत दारा सिंह चौहान को फिर से जिताने में झोंक दी. प्रशासन और सरकारी मशीनरी तक सक्रिय हो गई. लेकिन सुधाकर सिंह ने न सिर्फ मुकाबला किया, बल्कि करीब 50 हजार वोटों से दारा सिंह को करारी हार दी. इस जीत के बाद उन्हें पूर्वांचल में शेर-ए-घोसी कहा जाने लगा.

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