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शून्य कर वसूली पर नगर विकास विभाग सख्त, 11 निकायों को नोटिस जारी, मांगा प्रतिवेदन

नगर विकास विभाग ने राज्य के 11 शहरी निकायों की कर और सेवा शुल्क वसूली में लापरवाही को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है. विभाग ने इन निकायों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक दिन के भीतर वसूली से संबंधित प्रतिवेदन मांगा है.
 

Ranchi :   नगर विकास विभाग ने राज्य के 11 शहरी निकायों की कर और सेवा शुल्क वसूली में लापरवाही को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है. विभाग ने इन निकायों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक दिन के भीतर वसूली से संबंधित प्रतिवेदन मांगा है. विभाग ने जिन 11 निकायों को नोटिस जारी किया है,  उनमें विश्रामपुर, चतरा, दुमका, मधुपुर, फुसरो, रामगढ़ नगर परिषद, चाकुलिया, खूंटी, महागामा और सरायकेला-खरसावां नगर पंचायत शामिल हैं.

 

 

 

राजस्व वसूली ना होने से विकास योजनाएं हो रहीं प्रभावित

 

विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में जारी निदेश के बावजूद इन निकायों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित केंद्रीय प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य सरकारी विभागों से कोई भी राजस्व वसूली नहीं की है. 
विभाग का कहना है कि शून्य वसूली से शहरी विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और निकायों की आत्मनिर्भरता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है. 

 

राजस्व वसूली की प्रगति रिपोर्ट न देने पर विभाग असंतुष्ट

 

विभाग का कहना है कि इन निकायों की ओर से अब तक कोई प्रगति रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, जिससे विभाग असंतुष्ट है. विभाग ने निर्देश दिया है कि संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी एक दिन के भीतर राजस्व वसूली  प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराएं. इसके अलावा सभी केंद्रीय प्रतिष्ठानों की नामवार सूची और संबंधित सैफ नंबर भी रिपोर्ट में अनिवार्य रूप से जोड़ें.

 

सभी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश


विभाग ने कहा है कि अब राज्य सरकार गंभीरता से केंद्र सरकार के विभागों,  सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य संस्थानों से कर और सेवा शुल्क की वसूली सुनिश्चित करना चाहती है. इसके लिए सभी निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करें. यदि संबंधित निकाय निर्देशों की अनदेखी करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

 

 51 में से 11 निकायों की कर वसूली शून्य 


झारखंड के कुल 51 नगर निकायों में से इन 11 निकायों की कर वसूली शून्य रही है. विभाग के अनुसार, इससे न केवल शहरी विकास योजनाओं को वित्तीय झटका लगा है, बल्कि इन निकायों की आत्मनिर्भरता भी प्रभावित हुई है.

 


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