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शहरी स्थानीय निकायों ने 2090 करोड़ के खर्च पर एजी की आपत्तियों का जवाब नहीं दिया

राज्य के 40 शहरी स्थानीय निकायों ने महालेखाकार द्वारा 2090.90 करोड़ रुपये के खर्च पर उठायी गयी आपत्तियों का जवाब नहीं दिया. राज्य सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए अनुशंसित कार्यों में से सिर्फ चार का ही अधिकार दिया.
 

Ranchi: राज्य के 40 शहरी स्थानीय निकायों ने महालेखाकार द्वारा 2090.90 करोड़ रुपये के खर्च पर उठायी गयी आपत्तियों का जवाब नहीं दिया. राज्य सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए अनुशंसित कार्यों में से सिर्फ चार का ही अधिकार दिया. 

 

सरकार द्वारा पंचायतों को अपने टैक्स लगाने और वसूलने का नियम नहीं बनाने की वजह से वित्त आयोग दवारा अनुशंसित 486.09 करोड़ नहीं मिला. विधानसभा में स्थानीय निकायों से संबंधित पेश CAG की रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.

 

विधानसभा में पेश स्थानीय निकायों से संबंधित रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में 50 शहरी स्थानीय निकाय हैं. इसमें नौ नगर निगम, 21 नगर परिषद,19 नगर पंचायत और एक अधिसूचित क्षेत्र समिति शामिल है. महालेखाकार ने वर्ष 2017-22 की अवधि के लिए 40 शहरी स्थानीय निकायों का ऑडिट किया. 

 

ऑडिट के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर 2090.90 करोड़ रुपये के खर्च पर आपत्ति करते हुए 431 इंस्पेक्शन रिपोर्ट जारी किये गये. हालांकि शहरी स्थानीय निकायों ने इसमें एक का भी जवाब नहीं दिया. इससे ऑडिट के बाद जारी किये गये इंस्पेक्शन रिपोर्ट का निपटारा नहीं हुआ. 

 

शहरी स्थानीय निकायों ने मार्च 2022 तक 7592.10 करोड़ रुपये के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया था. 13वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में शहरी स्थानीय निकायों को अपने परिसंपत्तियों पर लगने वाले टैक्स का 85 प्रतिशत वसूलने का लक्ष्य निर्धारित किया था. लेकिन सभी शहरी निकाय इस लक्ष्य को पूरा करने में असमर्थ रहे. इससे 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में 488.45 करोड़ रुपये कम मिला.

 

पंचायती राज संस्थाओं के ऑडिट के दौरान पाया गया कि इनके लिए 19 कार्यों को हस्तांतरित करने के लिए अनुशंसा की गयी थी. लेकिन राज्य सरकार ने इसके मुकाबले सिर्फ चार को ही पूरा किया था. 2015-19 तक अवधि में ग्राम पंचायतों ने वार्षिक योजानाएं नहीं तैयार की थी. इस अवधि में ग्राम सभाओं में तैयार की गयी योजनाओं के आधार पर ही योजनाओं को लागू किया गया. 

 

राज्य सरकार ने 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में मिली 258.22 करोड़ का उपयोग जनवरी 2022 तक नहीं किया था. इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र देने में 183 दिनों तक देर करने की वजह से केंद्र से अगली किस्त मिलने में देर हुई. 

 

राज्य सरकार ने पंचायतों को अपने स्रोतों पर टैक्स लगाने और वसूलने से संबंधित नियम नहीं बनाया. इससे राज्य सरकार को 14वें वित्त आयोग का 486.09 करोड़ नहीं मिला. ऑडिट में पाया गया कि राज्य सरकार द्वारा रोक लगाने के बावजूद पश्चिम सिंहभूम जिला परिषद ने 19 नये पंचायत भवनों के निर्माण के लिए 7.08 करोड़ का विचलन किया.

 

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