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अमेरिका ने मध्य पूर्व से सैनिकों की वापसी शुरू की, ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार नहीं देने की दी चेतावनी

Washington :  ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिकी कर्मियों को मध्य पूर्व से बाहर निकाला जा रहा है.  उन्होंने इस क्षेत्र को खतरनाक स्थान बताया. ट्रंप ने दृढ़ता से दोहराया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका इराक समेत कई देशों में अपने दूतावासों को आंशिक रूप से खाली कर रहा है और सैन्य परिवारों को स्वैच्छिक रूप से क्षेत्र छोड़ने की अनुमति दे रहा है.

विदेश विभाग ने कई क्षेत्रों से कर्मियों को दिए हटाने के आदेश

ईरान के साथ तनावपूर्ण हालात और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने 11 जून को अपने वैश्विक यात्रा परामर्श को अपडेट किया है. नए दिशा-निर्देशों में गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों को कई मध्य पूर्वी देशों से वापस बुलाने का आदेश दिया गया है. इस फैसले के तहत बगदाद सहित इराक के कई हिस्सों में अमेरिकी दूतावासों ने आंशिक निकासी शुरू कर दी है. हालांकि, कुवैत में अमेरिकी दूतावास फिलहाल पूरी तरह से संचालित हो रहा है.

 

अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बहरीन में तैनात अमेरिकी सैन्य कर्मियों के परिवारों के लिए स्वैच्छिक प्रस्थान की अनुमति दे दी है. बहरीन, अमेरिका की प्रमुख क्षेत्रीय सैन्य उपस्थिति का केंद्र है. वहीं, कतर स्थित अल उदीद एयर बेस, जो इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य प्रतिष्ठान है, में अब तक किसी भी प्रकार की निकासी का आदेश नहीं दिया गया है और वहां सैन्य संचालन सामान्य रूप से जारी है. 

 

तेल की कीमतों में उछाल, शिपिंग रूट खतरे में

अमेरिका के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 4% बढ़कर 69.18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गयी है. ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी ने संभावित सैन्य वृद्धि की भी चेतावनी दी है, जो खाड़ी, ओमान की खाड़ी और होर्मुज के जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को खतरे में डाल सकती है. यह सभी ईरान की सीमा से लगे हैं. ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने पुष्टि की है कि वह घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है. 

 

इराक में बढ़ा अमेरिकी तनाव, ईरान समर्थित गुट सक्रिय

इराक में अभी भी करीब 2,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, लेकिन वहां मौजूद ईरान समर्थक सशस्त्र गुट अमेरिकी ठिकानों को लगातार निशाना बना रहे हैं. हालांकि अक्टूबर 2023 के गाजा संघर्ष के बाद से हमलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन माहौल अब भी तनावपूर्ण है. इस बीच, अमेरिका के एक प्रमुख सहयोगी इजराइल ने  इराक और सीरिया में ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे सुरक्षा परिदृश्य और जटिल हो गया है. 

 

परमाणु वार्ता से पहले सैन्य रुख

तेहरान द्वारा वाशिंगटन के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि ईरान जल्द ही एक प्रतिप्रस्ताव पेश करेगा. हालांकि ईरान बार-बार यह दावा करता रहा है कि उसकी मंशा परमाणु हथियार हासिल करने की नहीं है. लेकिन अमेरिका और उसका करीबी सहयोगी इजराइल इस आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं. दोनों देशों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान परमाणु हथियारों की दिशा में आगे बढ़ा, तो सैन्य प्रतिक्रिया से इनकार नहीं किया जाएगा. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला ने राष्ट्रपति को विभिन्न सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है. उन्होंने अपनी निर्धारित कांग्रेस की गवाही को भी स्थगित कर दिया है, ताकि सैन्य रणनीति पर पूरा फोकस रखा जा सके. 

 

ईरान की चेतावनी, हमला किया गया तो जवाब जरूर मिलेगा

ईरान के यूएन मिशन ने एक्स पर एक विद्रोही बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि अमेरिकी सैन्यवाद केवल क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देता है और इस बात पर जोर दिया कि तेहरान परमाणु हथियारों का पीछा नहीं करता है. इस बीच, ईरानी रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी ईरान पर हमला करते हैं, तो ईरान क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा. वहीं, ईरान के यूएन मिशन ने बयान जारी कर कहा कि सैन्य धमकियाँ वाशिंगटन की वार्ता पुस्तिका में एक सुसंगत रणनीति बनी हुई हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी संघर्ष के गंभीर परिणाम होंगे. 

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