अदालत के इस फैसले को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ये फेडरल जज सच में हमारे लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि कोर्ट सिस्टम में जो कुछ भी हो रहा है, वह वाकई में अजीब है. कहा कि इससे हमारे देश को बुरी तरह नुकसान पहुंच रहा है.
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज लियो सोरोकिन ने 20 डेमोक्रेटिक स्टेट अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर मुकदमे पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है.अदालत ने इसे अवैध कर (unlawful tax) करार देते हुए स्पष्ट किया कि केवल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को ही ऐसा कर लगाने का अधिकार है.
बता दें कि ट्रंप प्रशासन की इस विवादास्पद नीति के लागू होने से पूर्व नये H-1B आवेदन पर सरकारी शुल्क लगभग $2,000 से $4,000 के बीच होता था. अदालत के फैसले से अमेरिका में काम करने की चाहत रखने वाले विदेशी कुशल कर्मचारियों और भारतीय आईटी पेशेवरों को इस भारी शुल्क से बड़ी राहत मिली है。
डिस्ट्रिक्ट जज ने फैसला देते हुए माना कि यह शुल्क कोई जुर्माना नहीं, बल्कि एक भारी टैक्स था. इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के पास कोई कानूनी आधार या संसद की मंजूरी नहीं थी. अदालत ने यह भी कहा कि आवश्यक कानूनी आवश्यकताओं का पालन न कर प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम और संविधान का उल्लंघन किया गया है.
जान लें कि पिछले साल सितंबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करने और कार्य वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की आवश्यकता का हवाला दिया था. इसी क्रम में प्रत्येक नये एच-1बी वीजा आवेदन पर 100,000 डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा जारी की थी.
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