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वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज विवाद: NMC ने की MBBS कोर्स की मान्यता रद्द जानें पूरी रिपोर्ट

Jammu : जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) से नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने MBBS कोर्स चलाने की अनुमति तत्काल प्रभाव से वापस ले ली है. यह फैसला कॉलेज में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद लिया गया, जिसमें फैकल्टी की कमी, रेजिडेंट डॉक्टर्स की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर की खामियां और मरीजों की कम संख्या शामिल हैं.
 
यह कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित है, जो मुख्य रूप से श्रद्धालुओं के चढ़ावे से फंडेड है. 2025-26 सत्र के लिए 50 सीटों वाली पहली बैच में NEET मेरिट के आधार पर 42 मुस्लिम छात्र (ज्यादातर कश्मीर घाटी से), 7 हिंदू और 1 सिख छात्र का चयन हुआ था. इस पर जम्मू में हिंदू संगठनों ने तीव्र विरोध किया, arguing कि श्राइन के फंड्स से बने कॉलेज में हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. बता दें, NMC की मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 2 जनवरी 2026 को सरप्राइज इंस्पेक्शन किया. रिपोर्ट के अनुसार- 
फैकल्टी में 39% कमी
रेजिडेंट डॉक्टर्स में 65% कमी
OPD मरीजों की संख्या अपेक्षा से बहुत कम (182 बनाम 400)
बेड ऑक्यूपेंसी मात्र 45% (अपेक्षा 80%)

वहीं, क्लिनिकल मटेरियल और इंफ्रास्ट्रक्चर में गंभीर खामियां पाई गईं. जिसके बाद NMC ने कहा कि ऐसी स्थिति में कोर्स जारी रखना मेडिकल एजुकेशन की क्वालिटी को खतरे में डाल देगा. कॉलेज को दी गई लेटर ऑफ परमिशन (LoP) तुरंत रद्द कर दी गई.

 

छात्रों का भविष्य सुरक्षित: NMC

अच्छी खबर यह है कि कोई भी छात्र अपनी सीट नहीं खोएगा. NMC ने निर्देश दिया है कि सभी 50 छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेररी सीट्स पर एडजस्ट किया जाए. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि मेरिट के आधार पर एडमिशन में धर्म कोई भूमिका नहीं निभा सकता.


ये क्वालिटी ओवर क्वांटिटी है : बीजेपी 

बता दें इस मामले को लेकर हिंदू संगठन जैसे श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति (60 से अधिक संगठनों का गठबंधन) ने प्रदर्शन किए और कॉलेज को हिंदू माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन घोषित करने या मुस्लिम छात्रों को शिफ्ट करने की मांग की. वहीं BJP ने NMC के फैसले का स्वागत किया साथ ही इसे "क्वालिटी ओवर क्वांटिटी" बताया. विपक्षी दल और कुछ लोग इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव बता रहे हैं. बताते चलें कि, यह मामला मेरिट, धर्म और पब्लिक फंडिंग के उपयोग पर बड़ी बहस छेड़ रहा है. कॉलेज भविष्य में कमियों को दूर कर नई अनुमति के लिए आवेदन कर सकता है.

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