Ranchi News: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के VC दिनेश सिंह ने स्मार्ट क्लास रूम के लिए बाजार से ढाई गुना अधिक कीमत पर डिजिटल उपकरणों की खरीद की. लेकिन स्पेशल ऑडिट टीम को इससे जुड़ी फाइल नहीं दी. खरीद में वित्तीय नियमों का पालन नहीं करने की वजह से अब इन सामग्रियों का भुगतान लंबित है और सप्लायर कुलपित के चक्कर लगा रहा है.
कुलपति ने स्मार्ट क्लास रूम के नाम पर डिजिटल उपकरणों की खरीद के लिए सबसे पहले कॉलेजों में चल रहे Self Financed Courses को विश्वविद्यालय स्तर पर हस्तांतरित किया. विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारियों के अलावा कॉलेज के प्राचार्यों ने इसका विरोध किया. क्योंकि इसमें व्यवहारिक परेशानियां थी. इसके बावजूद कुलपति ने किसी की नहीं सुनी और मनमानी की.

Aero डिजिटल पोडियम की फोटो
इसके बाद उन्होंने ViewSonic 86-inch के इंटरेक्टिव पैनल और Aero डिजिटल पोडियम की खरीद के लिए GeM पोर्टल पर विज्ञापन प्रकाशित किया. इस खरीद के लिए क्रय-विक्रय समिति या वित्त समिति की अनुमति नहीं ली. इसके बाद उन्होंने 12 इंटरेक्टिव पैनल और पांच डिजिटल पोडियम की खरीद कर ली. साथ ही इन सामग्रियों को विश्वविद्यालय में लगा दिया. इस सामग्रियों के लिए विश्वविद्यालय दवारा सप्लायर को 86 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है. लेकिन खरीद में नियमों का उल्लंघन होने की वजह से अब तक इसका भुगतान नहीं हो सका है.

View Sonic 86 inch Interactive Display Panel की फोटो
समीक्षा में पाया गया कि विश्वविद्यालय ने इन सामग्रियों की खरीद बाजार मूल्य से ढाई गुना अधिक दर पर की है. जांच पड़ताल में इस बात की जानकारी मिली कि विश्वविद्यालय ने जिस View Sonic 86 inch Interactive Display Panel की खरीद की है, उसका Model-IF8633G-N है.
इंडिया मार्ट पर इस पैनल की कीमत 1.65 लाख रुपये है. ट्रेड इंडिया पर इसकी कीमत 1.70 लाख रुपये है. लेकिन विश्वविद्यालय ने इसे 4.60 लाख रुपये की दर से खरीदा है. जबकि इसका अधिकृत विक्रेता के पास यह 1.75 लाख रुपये की दर पर उपलब्ध है. इस तरह सिर्फ 86 inch Interactive Display Panel की खरीद में 50 लाख रुपये की गड़बड़ी की गयी.
विश्वविद्यालय ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी किये बिना ही पांच Aero Digital Podium भी बाजार के ढाई गुना से अधिक कीमत पर खरीदी. इंडिया मार्ट पर इस पोडियम की कीमत 2.10-2.35 लाख रुपये है. ट्रेड लाइन पर यह 2.20-2.40 लाख रुपये की दर पर उपलब्ध है. जबकि इस उपकरण को बनाने वाले के पास से इसे सीधे 2.25-2.50 लाख रुपये की दर से खरीदा जा सकता है. इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने इस पोडियम को 6.19 लाख रुपये की दर से खरीदी.
कुलपति द्वारा बरती गयी विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं की शिकायत के बाद राज्यपाल ने स्पेशल ऑडिट का आदेश दिया था. इस आदेश के आलोक में वित्त विभाग की ऑडिट टीम से ने स्पेशन ऑडिट किया. लेकिन कुलपति और उनके चहेतों ने इस खरीद से जुड़ी फाइल ऑडिट टीम को नहीं दी. इससे ऑडिट टीम अपनी रिपोर्ट में इस खरीद में हुई गड़बड़ी का उल्लेख नहीं कर सकी.
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