- चुट्टूपालू घाटी में दुर्घटनाओं में कमी लाने पर मंथन
- अलग-अलग समय पर चलेगा वाहन चेकिंग अभियान
- घाटी में कमजोर नेटवर्क को लेकर लगेंगे मोबाइल टावर
- स्पीड डिटेक्टर कैमरे के साथ लगेंगे डिजिटल स्क्रीन
- डीसी का NHAI और संबंधित अधिकारियों को निर्देश
Ramgarh: चुट्टूपालू घाटी सड़क दुर्घटनाओं की वजह से परेशानी का पर्याय बन चुकी है. अबतक सैकड़ों लोगों की जान इस घाटी में हुए सड़क हादसे में चली गई. इस घाटी में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर डीसी ने बुधवार को अहम बैठक बुलाई. बैठक में पुलिस अधीक्षक मुकेश लुनायत सहित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), जिला परिवहन विभाग, सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए.
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बैठक के दौरान डीसी ने एनएचएआई को निर्देश दिया गया कि टोल प्लाजा से घाटी की ओर लगभग 100 मीटर तक मल्टीपल पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम स्थापित कर उसका ट्रायल किया जाए. साथ ही घाटी में लगी सभी स्ट्रीट लाइटों को शत-प्रतिशत कार्यशील करने, प्रत्येक 200 मीटर पर डेंजर जोन से संबंधित साइन बोर्ड लगाने, शराब जांच (ड्रंक एंड ड्राइव) संबंधी चेतावनी बोर्ड स्थापित करने, एस्केप लेन को आसानी से समझने योग्य संकेतकों के साथ विकसित करने तथा सहायता के लिए हेल्पलाइन सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए गए.

उपायुक्त ने घाटी में दृश्यता बढ़ाने के उद्देश्य से झाड़ियों की साफ-सफाई कराने तथा एस्केप रैंप के अंतिम छोर पर सोलर हाई मास्ट लाइट लगाने का भी निर्देश दिया. इसके अतिरिक्त स्पीड कैमरे लगाने एवं सड़क किनारे ऐसी डिजिटल स्क्रीन स्थापित करने के निर्देश दिए गए जिन पर वाहन चालकों को उनकी वास्तविक गति प्रदर्शित हो सके.
अनुमंडल पदाधिकारी को घाटी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक स्थानों पर मोबाइल टावर स्थापित कराने हेतु संबंधित सेवा प्रदाताओं से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया.
बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस एवं परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया कि घाटी में अलग-अलग समय पर सघन वाहन जांच अभियान चलाया जाए. जांच के दौरान सीट बेल्ट, हेलमेट, ओवरस्पीडिंग तथा ब्रेथ एनालाइजर के माध्यम से शराब पीकर वाहन चलाने वालों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए.
एनएचएआई एवं जिला परिवहन पदाधिकारी को घाटी में रेस्क्यू व्हीकल की आवश्यकता का आकलन कर 24 घंटे उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य किया जा सके.
बैठक के दौरान सड़क निर्माण विभाग एवं अनुमंडल पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-33 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग-23 पर स्थित सभी ब्लैक स्पॉट की पहचान इसी माह के भीतर कर आवश्यक सुधारात्मक कार्यों की कार्ययोजना तैयार करें.
उपायुक्त ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण कर अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने कहा कि चुट्टूपालू घाटी में दुर्घटनाओं में कमी लाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
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