Garhwa News: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के सोनपुरवा मोहल्ले में रहने वाले ईरानी मूल के परिवारों के दस्तावेजों की जांच शुरू हो गई है. वार्ड नंबर 1 और 3 में रेलवे लाइन के पार रहने वाले इन परिवारों के नाम SIR प्रक्रिया में सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर पड़ताल तेज हुई है.
शनिवार को अंचल कार्यालय की टीम वार्ड नंबर 3 पहुंची और संबंधित परिवारों से जमीन के दस्तावेजों की जानकारी ली. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई परिवारों ने रजिस्टर्ड केवाला के जरिए जमीन खरीदी है. इन जमीनों का नामांतरण भी हुआ है और नियमित रूप से लगान की रसीद कटने की जानकारी दी गई है.
जांच का दायरा सिर्फ मतदाता सूची तक सीमित नहीं है. इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ किस आधार पर मिला, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है. प्रशासन जमीन और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है.
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दस्तावेजों के साथ नागरिकता साबित करने की चुनौती
ईरानी मूल के परिवारों का कहना है कि उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर कार्ड जैसे दस्तावेज मौजूद हैं. सोनपुरवा निवासी जलाल अली के अनुसार, उनके परिवार के पास वर्ष 1992 का जमीन का केवाला भी है. उनका कहना है कि SIR के तहत नागरिकता से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस मिला है, जिसके बाद परिवार जरूरी कागजात जुटा रहा है.
हामिद अली ने बताया कि उनके पूर्वज ईरान से भारत आए थे और बाद में मध्यप्रदेश में रहने लगे. उनके माता-पिता वर्ष 1966 में गढ़वा पहुंचे थे. वहीं जलाल अली के अनुसार, उनका परिवार वर्ष 1980 में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से गढ़वा आया था. उनके मुताबिक, इस समुदाय के लोग महाराष्ट्र के पुणे और भुसावल के अलावा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में भी रहते हैं.
गढ़वा में पांच परिवारों को मिला पीएम आवास
जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 3 में ईरानी मूल के पांच परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है. अब SIR के साथ इन लाभों और संबंधित दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जा रहा है. स्थानीय स्तर पर इसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं.
कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन परिवारों को मतदाता सूची में शामिल करने और सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने में राजनीतिक लाभ का ध्यान रखा गया. उनका कहना है कि लंबे समय से गढ़वा में रह रहे कई जरूरतमंद परिवार आज भी सरकारी आवास जैसी सुविधाओं से वंचित हैं. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
फिलहाल प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि संबंधित परिवारों की नागरिकता, मतदाता सूची में नाम और सरकारी योजनाओं से जुड़े दस्तावेज नियमों के अनुरूप हैं या नहीं.
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