Ranchi News: बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के कारण विस्थापित हो रहे आदिवासी-मूलवासी परिवारों ने सोमवार को नामकुम अंचल कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किए. एयरपोर्ट विस्थापित मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर पुनर्वास, मुआवजा, क्षतिपूर्ति और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में सुधार की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो एयरपोर्ट को जाम किया जाएगा.
मोर्चा की पूर्व पार्षद पुष्पा तिर्की ने कहा कि एयरपोर्ट के नाम पर हुंडरू और गढ़ा टोली में जिला प्रशासन कार्रवाई करने पहुंचता है. आदिवासियों ने विकास के लिए वर्षों पहले अपनी सैकड़ों एकड़ जमीन दी, लेकिन अब तक उचित पुनर्वास नहीं किया गया. विस्थापित मोर्चा के महासचिव सुरेश गोप ने कहा कि नामकुम अंचल के हेथू मौजा में गैरमजरूआ जमीन की बिक्री हो रही है, लेकिन विस्थापितों को बसाने के लिए एक इंच जमीन भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है. मोर्चा ने हेथू मौजा में वर्ष 1941-42 के दौरान ब्रिटिश शासन में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय सेना के लिए इस्तेमाल की गई करीब 150 एकड़ जमीन का मामला भी उठाया.
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373 एकड़ जमीन अधिग्रहण, 250 परिवारों पर विस्थापन का संकट
मोर्चा ने कहा कि बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए करीब 373 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है. इसकी वजह से गढ़ा टोली के करीब 250 परिवारों के विस्थापित हो जायेंगे. इससे पहले भी एयरपोर्ट के लिए वर्ष 1962-63 में लोगों को हटाकर वर्तमान एयरपोर्ट बनाया गया है. उनका पुनर्वास नहीं किया गया. बाद में कई परिवार हेथू-गढ़ा टोली में अपनी जमीन पर बस गए.
वर्ष 2007-08 में एयरपोर्ट के लिए दोबारा जमीन अधिग्रहण किया गया है. इसमें करीब 1000 आदिवासी-मूलवासी प्रभावित हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई परिवारों को अब तक मकान की क्षतिपूर्ति और मुआवजा नहीं मिल सका है.
जाति प्रमाण-पत्र की समस्या दूर करने का आश्वासन
नामकुम अंचलाधिकारी कमल किशोर सिंह ने कहा कि विस्थापित लोगों के जाति प्रमाण-पत्र बनाने में पार्षद की अनुशंसा को लेकर आ रही परेशानी को दूर किया जाएगा. एयरपोर्ट में होने वाली बैठक में ग्रामीणों की समस्याओं को रखा जाएगा और उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी.
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