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पानी संकट : झारखंड सरकार ने 9 माह पहले दिए 259 करोड़, पर अब भी 70,792 चापानल खराब

Ranchi : ठंड खत्म हो रही है और अब गर्मी दस्तक देने वाली है. ऐसे में झारखंड के कई जिलों में पानी का संकट गहराने की संभावना है. लेकिन जिला प्रशासन इससे बेफिक्र है. राज्य भर में अब भी 70 हजार से अधिक चापानल खराब पड़े हैं. यह स्थिति तब है, जब राज्य सरकार ने 9 माह पहले मरम्मत के लिए सभी जिलों के उपायुक्त को राशि उपलब्ध करा दी है. 

 

जानकारी के मुताबिक, चापानलों की मरम्मत के लिए सरकार ने 10 मई 2025 को 259 करोड़ रूपये खर्च करने की स्वीकृति दी थी. साथ ही जिलों के डीसी को निर्देश दिया था कि खराब चापानलों की मरम्मत का काम तेजी से कराया जाए. लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया.

 

आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 2,66,000 चापानल हैं, जिनमें से सिर्फ 1,95,226 काम कर रहे हैं. जबकि 70,792 चापानल खराब पड़े हुए हैं. इससे शहरी और ग्रामीण इलाकों के लोगों को पानी सकंट से गुजरना पड़ता है. ग्रामीण इलाकों में यह समस्या सबसे ज्यादा महसूस की जाती है, जहां लोग पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर होते हैं. 

 

 

कई जिलों में हजारों चापानल खराब

राज्य के नौ जिलों में 9000 से 3000 तक चापानल खराब पड़े हैं. बोकारो में सबसे अधिक 9,416 और गढ़वा में 8,569 चापानल खराब हैं. इसी तरह पाकुड़ में 3849, देवघर में 4776, धनबाद में 4121, दुमका में 3748, गिरिडीह में 4157, खूंटी में 3984 और रांची में 3643 चापानल खराब पड़े हैं.

 

किस जिला में कितने चापानल है खराब

जिला खराब चापानलों की संख्या
बोकारो 9,416
पाकुड़ 3,489
देवघर 4,776
धनबाद 4,121
दुमका 3,748
गढ़वा   8,569
गिरिडीह   4,157
खूंटी 3,984
रांची 3,643
चतरा 1,089
गोड्डा 1,752
गुमला 1,116
हजारीबाग 1,474
सरायकेला 2,019
सिमडेगा   2,072
जामताड़ा 2,493
कोडरमा 1,992
लातेहार 702
लोहरदगा 909
पलामू 1,254
पश्चिमी सिंहभूम 1,420
रामगढ़ 2,068 

                 

 

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