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हमलोग लड़े हैं तभी बचे हैः सीएम हेमंत

Saraikela: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि आज पूरी दुनिया के लिए नया साल है. लेकिन झारखंड के आदिवासी-मूलवासी, किसान और मजदूरों के लिए आज शहीद दिवस है. लोग आज अलग-अलग जगहों पर पिकनिक मना रहे हैं, लेकिन हम सब लोग यहां शहीदों को नमन करने के लिए एकत्रित हुए हैं.

 

झारखंड का गौरव पूर्ण इतिहास है. सीएम गुरुवार को खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर बोल रहे थे. इससे पहले उन्होंने खरसावां स्थित शहीद पार्क में शहीद स्मारक (शहीद बेदी) तथा वीर शहीद केरसे मुंडा चौक स्थित शहीद स्मृति-चिह्न पर श्रद्धांजलि अर्पित कर अमर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी.

 

उन्होंने कहा कि कोल्हान, संताल, उत्तरी और दक्षिणी छोटानागपुर या पलामू का क्षेत्र हो, जितनी शहादत इन क्षेत्र के लोगों ने दी है, उतना किसी राज्य में नहीं.

 

झारखंड को बचाने के लिए अनेक वीर सपूतों में अपनी कुर्बानी दी

सीएम ने कहा कि झारखंड के जल जंगल जमीन के साथ आदिवासी-मूलवासी को खत्म करने के लिए साथ ही यहां की खनिज संपदा को लूटने के लिए 100 साल पहले से काम चल रहा था. इस बीच अनेक वीर सपूतों ने हमें बचाने के लिए अपने आप को कुर्बान कर दिया.

 

किसी की पुलिस की गोलियों से जान चली गई तो किसी को फांसी पर चढ़ा दिया गया. कभी अंग्रेजों से लड़ाई तो कभी देश के पुलिसिया शासन से लड़ाई. जब तक हमलोग लड़े नहीं तब तक बचे नहीं. हमलोग लड़े हैं तभी बचे हैं.

 

इसका उदाहरण आज का ये खरसांवा शहीद दिवस है. हमें गर्व होना चाहिए कि हम ऐसे वीर सपूतों के वंशज हैं. जिन्होंने कभी हार नहीं मानी. कभी पीठ नहीं दिखाया. चाहे अंग्रेजों का शासन हो या पुलिसिया शासन.


आदिवासी, गरीब, पिछड़ा दलित को कोई देता नहीं

आदिवासी, गरीब, दलित, पिछड़ा और किसान को कोई देता नहीं है. उनके हक और अधिकार को लोग छीन लेते हैं. कोई बड़ा व्यापारी और पूंजीपति कभी हमारे आंखों के आंसु नहीं पोछते. जब-जब मौका मिला तो शहीदों को नमन कर संघर्ष शुरू किया. उस संघर्ष का परिणाम भी हमें मिलता है.

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