NewDelhi : पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार के समक्ष गंभीर चुनौती आ गयी है.आज गुरुवार की इंटर मिनिस्टेरियल ब्रीफिंग में चिंता जताते हुए कहा गया कि खाडी युद्ध का कई अहम सेक्टरों पर सीधा असर पड़ेगा.
वाणिज्य मंत्रालय ने इस संकट का सेक्टर-वाइज विश्लेषण करते हुए नुकसान का आकलन किया है. कहा गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अहम समुद्री रास्ता है. यहां सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है.
ब्रीफिंग में कहा गया कि भारत का लगभग 178 बिलियन Dollar(लगभग ₹14.9 लाख करोड़) का द्विपक्षीय व्यापार खाड़ी देशों (GCC) के साथ होता है. इस पर सीधा खतरा मंडरा रहा है.
अतिरिक्त सचिव लव अग्रवाल के अनुसार मौजूदा हालात सिर्फ तेल तक सीमित नहीं हैं, वरन एक्सपोर्ट और इंडस्ट्रियल सप्लाई पर भी प्रेसर बढ़ रहा है. शिपिंग गलियारा, बीमा लागत और कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है.
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार सर्वाधिक असर खाद्य और कृषि उत्पाद सेक्टर पर नजर आने की संभावना है. कहा गया कि पश्चिम एशिया भारत के लिए बड़ा बाजार है. इस बाजार में चावल, मसाले सहित अन्य कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में भेजे जाते हैं.
तनाव बढ़ने के कारण लॉजिस्टिक्स महंगे होने की संभावना हैं. डिलीवरी में देर हो सकती है. इस कारण निर्यातकों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं. वाणिज्य मंत्रालय का मानना है कि इंजीनियरिंग उत्पाद सेक्टर भी दबाव में आ सकता है. क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया जाता है.
कहा गया किरत्न और आभूषण उद्योग भी प्रभावित होगा. सर्वाधिक खतरा ऊर्जा और पेट्रोलियम सेक्टर को है.तेल की कीमतों में इजाफे से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है.
पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री की लागत बढ़ जायेगी. इसका असर कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ेगा. आशंका जताई गया कि केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में कच्चे माल की सप्लाई बाधित हो सकती है. फार्मास्युटिकल सेक्टर पर भी खतरा है.
बता दें कि कई जरूरी केमिकल्स और इंटरमीडिएट्स इस क्षेत्र से आते हैं. सप्लाई चेन में रुकावट आने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 2 मार्च 2026 को एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (IMG) गठित किया है.
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