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मेरी क्या गलती 13: हरियाणा की सरकारी नौकरी छोड़ झारखंड आए डॉ. अनिकेत, अब पछता रहे

Ranchi News: झारखंड में JPSC से चयनित फूड सेफ्टी ऑफिसरों की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद के बीच पलामू निवासी डॉ. अनिकेत द्विवेदी की कहानी सामने आई है. बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए हरियाणा सरकार की नौकरी छोड़कर झारखंड लौटे डॉ. द्विवेदी ने लंबे इंतजार के बाद JPSC के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की थी,
 

Ranchi News: झारखंड में JPSC से चयनित फूड सेफ्टी ऑफिसरों की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद के बीच पलामू निवासी डॉ. अनिकेत द्विवेदी की कहानी सामने आई है. बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए हरियाणा सरकार की नौकरी छोड़कर झारखंड लौटे डॉ. द्विवेदी ने लंबे इंतजार के बाद JPSC के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की थी, लेकिन नियुक्ति के महज दो महीने के भीतर ही उनके सामने नौकरी पर संकट खड़ा हो गया.

 

डॉ. अनिकेत द्विवेदी ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर साइंस में पीएचडी की है. JPSC में चयन से पहले वह हरियाणा सरकार में एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर पंचकूला स्थित कृषि निदेशालय के मुख्यालय में कार्यरत थे. उनका चयन बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में भी हुआ था, लेकिन उन्होंने हरियाणा में ही अपनी सेवा जारी रखी थी.

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डॉ. द्विवेदी के मुताबिक, उनकी तीनों बहनों की शादी हो चुकी है और घर में बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए वह अकेले हैं. इसी वजह से उन्होंने हरियाणा की सरकारी नौकरी छोड़कर अपने गृह राज्य झारखंड लौटने का फैसला किया. वर्ष 2018 से वह लगातार JPSC की प्रक्रिया में शामिल होते रहे और यह उनका चौथा इंटरव्यू था.

 

25 फरवरी को हुए इंटरव्यू के बाद 19 मार्च को परिणाम घोषित किया गया, जिसमें उनका चयन फूड सेफ्टी ऑफिसर के पद पर हुआ. इसके बाद 24 जून को प्रोजेक्ट भवन में स्वास्थ्य मंत्री के हाथों उन्हें नियुक्ति पत्र मिला. 25 जून को उन्होंने सिमडेगा जिले में योगदान भी दे दिया. हालांकि नियुक्ति के करीब दो महीने बाद ही इस बहाली को लेकर उठे विवाद ने उनके भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है.

 

डॉ. अनिकेत ने सरकार और न्यायालय से मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार की आशंका है तो सरकार अपनी मशीनरी के माध्यम से इसकी गहन जांच कराए.

 

उन्होंने कहा कि जांच के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए. जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उन्हें सार्वजनिक किया जाए, ताकि चयन प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में मौजूद भ्रम भी दूर हो सके.

 

डॉ. द्विवेदी ने अपनी सत्यनिष्ठा पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह जांच के लिए अपने सभी दस्तावेज और संबंधित कागजात उपलब्ध कराने को तैयार हैं. उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और यह पता चल पाएगा कि चयन प्रक्रिया में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं.

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