Ranchi News: गोड्डा में फूड सेफ्टी ऑफिसर के पद पर तैनात रहीं गिरिडीह की वैशाली कुमारी भी इस फैसले से प्रभावित हुई हैं. उन्होंने अपने गृह राज्य में सेवा देने के उद्देश्य से फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई), देहरादून में चल रही पीएचडी की पढ़ाई तक छोड़ दी थी.
वैशाली के मुताबिक, फूड सेफ्टी ऑफिसर की परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब तीन साल का समय लगा. चयन के बाद नौकरी मिलने से उनके परिवार में खुशी और भविष्य को लेकर उम्मीद जगी थी. मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली वैशाली के परिवार में उनके माता-पिता और दो भाई हैं. उनका कहना है कि ऐसे परिवारों में आय के साधन सीमित होते हैं और सरकारी नौकरी परिवार के लिए बड़ी उम्मीद होती है.
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वैशाली का कहना है कि नियुक्ति रद्द होने के फैसले से परिवार की सारी उम्मीदें अचानक टूट गई हैं. उनका कहना है कि उन्होंने नौकरी के भरोसे अपनी पीएचडी तक छोड़ दी, लेकिन अब उनके सामने आगे का रास्ता मुश्किल हो गया है.
वैशाली और उनके परिवार ने सरकार से इस मामले में पुनर्विचार की अपील की है. उनका कहना है कि अगर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कोई शिकायत या गड़बड़ी सामने आई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. बिना उचित जांच के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द करना उनके साथ अन्याय है.
वैशाली की सरकार से मांग है कि उनकी बात सुनी जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए. उनका कहना है कि वे किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि सिर्फ निष्पक्ष जांच और न्याय चाहती हैं.
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