Ranchi News: झारखंड में सरकारी नियुक्तियां रद्द किए जाने के बाद अभ्यर्थियों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इनमें ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने झारखंड में सेवा देने की उम्मीद में केंद्र सरकार की स्थायी नौकरी तक छोड़ दी थी. अब नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने दोबारा नौकरी हासिल करने की चुनौती है.
गिरिडीह निवासी रविंद्र कुमार भी ऐसे ही अभ्यर्थियों में शामिल हैं. रविंद्र कुमार पहले भारतीय रेलवे में नौकरी कर रहे थे. अपने गृह राज्य झारखंड में सेवा देने की इच्छा के कारण उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़कर झारखंड सरकार की नौकरी ज्वाइन की थी. उन्हें प्रोजेक्ट भवन स्थित सचिवालय में जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति मिली थी.
इसे भी पढ़ें -
रविंद्र कुमार के अनुसार, सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए उन्होंने लंबे समय तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की. अब नियुक्ति रद्द होने के फैसले ने उनकी वर्षों की मेहनत और भविष्य दोनों पर सवाल खड़ा कर दिया है. उनका कहना है कि उम्र सीमा निकल जाने के कारण अब केंद्र सरकार की दूसरी नौकरियों के लिए प्रयास करने का अवसर भी सीमित हो गया है.
पूरी नियुक्ति रद्द करने के बजाय दोषियों पर हो कार्रवाई
रविंद्र कुमार समेत प्रभावित अभ्यर्थियों की मांग है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और वास्तविक दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए. उनका कहना है कि कुछ लोगों की गलती के कारण सभी सफल और ईमानदार अभ्यर्थियों को सजा नहीं मिलनी चाहिए.
अभ्यर्थियों के अनुसार, उन्हें हाईकोर्ट के निर्देश के तहत कंडीशनल जॉइनिंग दी गई थी. इसमें यह व्यवस्था थी कि यदि कोई अभ्यर्थी भविष्य में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे में पूरी नियुक्ति रद्द करने के बजाय दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए.
अभ्यर्थियों ने सरकार से पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने और निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से हासिल की गई नौकरी को एक साथ रद्द करने से उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा पास की और नियुक्ति प्राप्त की थी.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

