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जहां विश्वास खत्म हो जाए, वहां वैवाहिक संबंध का टिके रहना संभव नहीं : हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विच्छेद (Divorce) से संबंधित एक मामले में कहा है कि जहां विश्वास खत्म हो जाए, वहां वैवाहिक संबंध का टिके रहना संभव नहीं होता. हाईकोर्ट ने पत्नी को राहत देते हुए फैमिली कोर्ट, जमशेदपुर का वर्ष 2024 का आदेश रद्द कर दिया और तलाक की अनुमति दे दी.
 
  • पत्नी की याचिका स्वीकार, कोर्ट ने तलाक को दी मंजूरी
  • जमशेदपुर फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विच्छेद (Divorce) से संबंधित एक मामले में कहा है कि जहां विश्वास खत्म हो जाए, वहां वैवाहिक संबंध का टिके रहना संभव नहीं होता. हाईकोर्ट ने पत्नी को राहत देते हुए फैमिली कोर्ट, जमशेदपुर का वर्ष 2024 का आदेश रद्द कर दिया और तलाक की अनुमति दे दी.

 

कोर्ट ने पत्नी की अपील स्वीकृत कर ली. इससे पहले जमशेदपुर फैमिली कोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि परित्याग साबित नहीं हुआ, जिसे पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.  

 

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने पाया कि पत्नी को दो बेटियों के कारण मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी गई. पति और सास के व्यवहार से साथ रहना असंभव हो गया था.

 

पत्नी का अलग होना मजबूरी थी, परित्याग नहीं. खंडपीठ ने कहा फैमिली कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया. विवाह आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित होता है और जब यह पूरी तरह टूट जाए तो संबंध को जबरन बनाए रखना उचित नहीं.

 

क्या है मामला

अपीलकर्ता सुमन कुमारी (बदला हुआ नाम) ने अपने पति सुनील कुमार (बदला हुआ नाम) के खिलाफ हिंदू विवाह अधिनियम के तहत परित्याग (desertion) के आधार पर तलाक की मांग की थी. दोनों की शादी 14 अगस्त 2014 को जमशेदपुर के एक मंदिर में हुई थी.

 

शादी के बाद उन्हें दो बेटियां हुईं. पत्नी का आरोप था कि बेटियों के जन्म के बाद पति का व्यवहार बदल गया. पति शराब पीकर गाली-गलौज करता था. सास भी पति का साथ देती थी. कई बार मारपीट कर घर से निकाल दिया गया. इन परिस्थितियों के कारण पत्नी 2019 से अलग रह रही थी. 

 

 

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