राजनीति, ब्यूरोक्रेसी व पुलिस को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक ताजा टिप्पणी आयी है. न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा है- राजनीतिक और नौकरशाही तंत्र की "सामंती मानसिकता" ने संवैधानिक शासन को जनसेवा के बजाय व्यक्तिगत (निजी) प्रभुत्व का साधन बना दिया है. उन्होंने पुलिस पर टिप्पणी यह की है कि पुलिस अधिकारी संविधान के प्रति नहीं, बल्कि बदलती सरकारों के प्रति अधिक झुकाव रखते हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी से फर्क किसे पड़ता है!
Last Updated: Jun 08, 2026 09:23 AM (IST)
राजनीति, ब्यूरोक्रेसी व पुलिस को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक ताजा टिप्पणी आयी है. न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा है- राजनीतिक और नौकरशाही तंत्र की "सामंती मानसिकता" ने संवैधानिक शासन को जनसेवा के बजाय व्यक्तिगत (निजी) प्रभुत्व का साधन बना दिया है. उन्होंने पुलिस पर टिप्पणी यह की है कि पुलिस अधिकारी संविधान के प्रति नहीं, बल्कि बदलती सरकारों के प्रति अधिक झुकाव रखते हैं.


