- 7 एनकाउंटर में 7 उग्रवादी ढेर किया
- 3 से अधिक नक्सलियों ने किया सरेंडर
Ranchi: झारखंड के गुमला जिला में इन दिनों एक युवा आईपीएस अधिकारी की खूब चर्चा हो रही है. नाम है हारिस बिन जमा. 2017 बैच के इस आईपीएस अधिकारी को करीब 11 महीने पहले गुमला जिले की कमान सौंपी गई थी. पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर जिले में लगातार अभियान चलाया. उनकी रणनीति सिर्फ एनकाउंटर तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने पुलिस और ग्रामीणों के बीच विश्वास कायम करने, खुफिया नेटवर्क मजबूत करने और नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया.
एसपी हारिस बिन जमा के नेतृत्व में गुमला पुलिस ने बीते 11 महीनों में सात बड़े अभियानों को अंजाम दिया, जिसमें सात खूंखार उग्रवादी मारे गए. इनमें पीएलएफआई के सेकेंड इन कमांड और 25 लाख के इनामी उग्रवादी मार्टिन केरकेट्टा का एनकाउंटर सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है. इसके अलावा जेजेएमपी के तीन सबजोनल कमांडर भी पुलिस मुठभेड़ में ढेर किए गए.

नक्सल अभियान में मौजूद एसपी हारिस बिन जमा की फोटो
लगातार पुलिस दबाव और सटीक रणनीति का असर यह हुआ कि जेजेएमपी के टॉप कमांडर रविंद्र यादव ने भी हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया. वर्तमान में वह हजारीबाग ओपन जेल में बंद है. वहीं 21 मई को ही 5 लाख के इनामी उग्रवादी श्रवण गोप और सचिन बेक ने भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. सचिन बेक संगठन में सबजोनल कमांडर, जबकि श्रवण गोप एरिया कमांडर के रूप में सक्रिय था.
पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इन आत्मसमर्पणों और लगातार अभियानों के बाद गुमला जिले से जेजेएमपी का पूरी तरह सफाया हो चुका है.
गौरतलब है कि 1990 के दशक में गुमला के बिशुनपुर, चैनपुर और घाघरा जैसे घने जंगल नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने बन चुके थे. गरीबी, बेरोजगारी और विकास की कमी का फायदा उठाकर उग्रवादी संगठनों ने स्थानीय युवाओं को अपने साथ जोड़ लिया था. लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां गांवों में दहशत का माहौल रहता था, वहीं अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाएं तेजी से गांवों तक पहुंच रही हैं. ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है और लोग सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं.
एसपी हारिस बिन जमा ने कहा कि गुमला में लगातार चलाए गए अभियान, सुरक्षा बलों की सतर्क कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक परिणाम सामने आया है. उन्होंने कहा कि जो उग्रवादी मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ देकर सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा.
करीब तीन दशक तक नक्सलवाद की मार झेलने वाला गुमला अब शांति, विकास और विश्वास की नई पहचान बना रहा है. वहीं युवा आईपीएस अधिकारी हारिस बिन जमा की कार्यशैली को लेकर पूरे राज्य में चर्चा हो रही है.
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