Ranchi: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 का परिणाम सिर्फ दो सीटों का फैसला नहीं है, बल्कि यह महागठबंधन की एकजुटता पर बड़ा सवाल भी छोड़ गया है. संख्या बल के दम पर दोनों सीटें जीतने का दावा करने वाला इंडिया गठबंधन अब अपने ही घर में जवाब तलाश रहा है. आखिर वह कौन था, जिसने आखिरी वक्त में राजनीतिक गणित बदल दिया?
चुनाव परिणाम में झामुमो के बैद्यनाथ राम विजयी रहे, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा. दूसरी ओर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी जीतकर राज्यसभा पहुंच गए. यह तब हुआ जब विधानसभा में महागठबंधन के पास स्पष्ट बढ़त मानी जा रही थी. नाथवानी की जीत के बाद क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में आग लगा दी है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि महागठबंधन के जख्म पर मरहम कौन लगाएगा? क्या कांग्रेस अपने सहयोगियों पर भरोसा कायम रख पाएगी? क्या झामुमो बीच-बचाव कर रिश्तों को संभालेगा? या फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर गठबंधन की दरार को और गहरा करेगा?
उधर भाजपा और एनडीए के लिए यह परिणाम राजनीतिक संजीवनी की तरह है. सत्ता से दूर होने के बावजूद एनडीए समर्थित उम्मीदवार की जीत ने यह संदेश दिया है कि विधानसभा के भीतर समीकरण उतने सरल नहीं हैं, जितने बाहर दिखाई देते हैं.
कांग्रेस की हार के बाद सहयोगी दलों पर सवाल उठने लगे हैं. कुछ नेताओं ने खुलकर क्रॉस वोटिंग की ओर इशारा किया है, जबकि दूसरी तरफ सहयोगी दल इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर बैठकों, नाराजगी और सफाई का दौर तेज होना तय माना जा रहा है.
राज्यसभा चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन असली राजनीतिक लड़ाई अब शुरू हुई है. महागठबंधन के घाव पर मरहम लगाने की जिम्मेदारी हेमंत सोरेन और गठबंधन नेतृत्व पर है, जबकि विपक्ष इस नतीजे को नमक की तरह बार-बार छिड़ककर महागठबंधन की एकता पर सवाल उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा.
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