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30 सितंबर तक सभी खराब ट्रांसफार्मर नहीं बदले गये तो दूंगा धरना : संजय सेठ

Ranchi: रांची के सांसद संजय सेठ ने कहा है कि संवादहीनता और संवेदनहीनता ही यूपीए सरकार की उपलब्धि बन गई है. बिजली की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि एक ट्रांसफार्मर बदलने में एक महीने लग रहे हैं. कई गांवों में तो 2-2 महीने में भी खराब ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे. जनप्रतिनिधि होने के नाते लोग उनके पास आते हैं, लेकिन ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं होने के कारण वे मदद नहीं कर पाते. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जाग जाइये. जनता की समस्याओं के समाधान के लिए कुछ काम करिए, वरना यह संवादहीनता और संवेदनहीनता, सत्ता से उखाड़ फेंकेगी. यह भी कहा कि अगर 30 सितंबर तक सभी खराब पड़े ट्रांसफार्मर को नहीं बदला गया तो वो अपने क्षेत्र की जनता के साथ धरना देंगे. संजय सेठ रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे.

सड़कों का हाल ऐसा कि लोग जान हथेली में लेकर घूम रहे

सांसद ने कहा कि लोड शेडिंग एक बड़ी समस्या हो गई है. वहीं अंडरग्राउंड केबलिंग का काम भी सुस्त रफ्तार में चल रहा है. शहर में सड़कों की स्थिति भी काफी बदहाल हो चुकी है. जबसे यह सरकार आई है, सड़कों का मेंटेनेंस नहीं किया गया है. कई स्थानों पर सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं. लोग जान हथेली पर लेकर चल रहे हैं. कानून व्यवस्था भी बदतर हो गई है. सरकार बनने के साथ कोल्हान में 7 लोगों की हत्या हुई थी. उसके बाद से यह सिलसिला रुक नहीं रहा है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. उन्होंने कहा कि वे तीन साल में जनसमस्याओं को लेकर सरकार को सैकड़ों पत्र लिख चुके हैं. हजारों बार ट्विट कर चुके हैं, लेकिन सरकार के रहनुमा किसी भी बात का कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझते. इसे भी पढ़ें – अवैध">https://lagatar.in/money-laundering-in-illegal-coal-block-allocation-the-court-took-cognizance/">अवैध

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सिर्फ एक प्रमाण पत्र के कारण कैंसर अस्पताल शुरू नहीं हो रहा

संजय सेठ ने चांडिल डैम का भी मुद्दा उठाया. कहा कि डैम उस क्षेत्र के लोगों के लिए काल बन गया है. डैम में 183 मीटर पानी रखा जाता है और इसकी वजह से सैकड़ों गांव डूबे हुए हैं. कई बार उन्होंने मुख्यमंत्री से डैम का पानी खोलने का आग्रह किया, लेकिन कभी सरकार ने ध्यान नहीं दिया. वहीं कांके में अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल बनकर तैयार है, लेकिन राज्य के लोग कैंसर के इलाज के लिए दूसरे राज्यों में धक्के खाने को मजबूर हैं. सिर्फ एक प्रमाण पत्र के अभाव में काम लटका हुआ है. सरकार थोड़ी भी संवेदनशीलता दिखाये तो यह अस्पताल 24 घंटे में शुरू हो जाएगा. इसे भी पढ़ें – बूढ़ा">https://lagatar.in/provide-benefits-of-government-schemes-by-setting-up-camps-in-budha-pahar-parasnath-and-saranda-cm/">बूढ़ा

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