Ranchi: जेपीएससी और जेएसएससी में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में चल रहा छात्र आंदोलन अब 12वें दिन में पहुंच गया है. शुरुआत में यह पूरी तरह छात्रों का आंदोलन था, लेकिन अब इसकी गूंज राज्य की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई देने लगी है. नेशनल मीडिया लगातार इस आंदोलन को प्रमुखता दे रही है, और कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म भी रांची से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं.
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आंदोलन जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसकी कमान धीरे-धीरे छात्रों के हाथ से निकलकर बड़े राजनीतिक दलों, राष्ट्रीय चेहरों और दिल्ली की मीडिया के हाथ में जा सकती है. ऐसे में सरकार के सामने सिर्फ परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक और छवि की चुनौती भी खड़ी हो सकती है.
पिछले कुछ दिनों में आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय मीडिया की कवरेज तेजी से बढ़ी है. कई राष्ट्रीय अखबारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इसे प्रमुख खबर बनाया. वीडियो रिपोर्ट, ग्राउंड रिपोर्ट और लाइव कवरेज के जरिए यह मुद्दा अब झारखंड से बाहर भी चर्चा में है.
आंदोलन के साथ अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आंदोलन का समर्थन किया. भाजपा पहले ही सीबीआई जांच की मांग कर चुकी है. दूसरी ओर छात्र लगातार कह रहे हैं कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य का आंदोलन है.
सरकार भी सक्रिय दिख रही है. बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. बाद में उन्होंने कहा कि मामला अब राष्ट्रीय स्तर का रूप ले चुका है. जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं, कई लोग जेल जा चुके हैं और सरकार जांच रिपोर्ट के आधार पर ठोस फैसला लेगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के दरवाजे छात्रों के लिए हमेशा खुले हैं.
बुधवार को प्रशासन की ओर से SDO और ADM भी आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों से बातचीत की. प्रशासन ने वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर कायम रहे.
इस बीच आंदोलन और तेज करने की भी घोषणा हो चुकी है. छात्रों ने 10 अगस्त को तिरंगा मार्च और विधानसभा घेराव का ऐलान किया है. वहीं देवेंद्र नाथ महतो ने सोनम वांगचुक की अपील पर पानी पी लिया है, लेकिन अनशन जारी रखने की बात कही है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार जल्द कोई ऐसा फैसला लेगी जिससे आंदोलन खत्म हो जाए, या फिर यह आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति और दिल्ली की मीडिया के लिए भी बड़ा मुद्दा बन जाएगा.
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