Ranchi News: महिला किसान खुशहाली योजना को प्रभावी बनाने के लिए राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को होटल रेडिसन ब्लू में हुआ. कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं. राज्यभर से महिला किसान, कृषि क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स और विभागीय अधिकारी कार्यक्रम में पहुंचे.
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कृषि मंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की प्राथमिकता है.नई योजना का उद्देश्य महिला किसानों को पहचान और आर्थिक मजबूती देना है. उन्होंने कहा कि योजना को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाएगा.
स्टेकहोल्डर्स और महिला किसानों के सुझावों को योजना में शामिल किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि योजना राज्य में खेती की सोच बदलने में मदद करेगी. पारंपरिक खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में काम होगा.
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है.महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आजीविका में सुधार किया जाएगा. बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर योजना में विशेष ध्यान दिया जाएगा. कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन से महिलाओं की आय बढ़ाने का प्रयास होगा.
कृषि विभाग के विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी ने योजना की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि महिला किसानों की क्षमता विकसित करना योजना का प्रमुख उद्देश्य है. निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि स्टेकहोल्डर्स के सुझाव योजना को अधिक प्रभावी बनाएंगे.
निदेशक कृषि विद्यानंद शर्मा पंकज ने कहा कि योजना व्यापक और व्यावहारिक होगी.उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक लाभ को योजना का केंद्र बनाया गया है. योजना के ड्राफ्ट को बेहतर बनाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई.
जेएसएलपीएस के सीईओ अनन्य मित्तल ने महिला समूहों की भूमिका बताई. उन्होंने कहा कि जेएसएलपीएस से 3.2 लाख एसएचजी जुड़े हुए हैं. इन समूहों में करीब 32 लाख महिलाएं आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हैं.
निदेशक पशुपालन रोबिन टोप्पो ने सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पशुपालन योजनाओं से महिलाओं को रोजगार मिल रहा है. मुर्गी, सुअर और बत्तख पालन से आय बढ़ाने के अवसर मिल रहे हैं.
कार्यक्रम में महिला किसान खुशहाली योजना का प्रेजेंटेशन भी दिया गया. इसमें योजना के उद्देश्य, दायरे और आईएफएस मॉडल की जानकारी दी गई. इसके बाद स्टेकहोल्डर्स और महिला किसानों के साथ खुली चर्चा हुई. कार्यक्रम में उद्यान और मृदा संरक्षण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे. नाबार्ड, लीड बैंक, आईसीएआर, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और एफपीओ प्रतिनिधि शामिल हुए.
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