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महिला सुपरवाइजर नियुक्ति केस : हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश पर रोक बरकरार रखा

Ranchi News : दरअसल, महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेज वेरिफिकेशन में त्रुटि निकालकर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी. एकल पीठ ने जेएसएससी द्वारा प्रार्थियों के दस्तावेज वेरिफिकेशन के दौरान उनके उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया था. साथ ही कोर्ट ने प्रार्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल कराने का आदेश जेएसएससी को दिया था. एकल पीठ में आकांक्षा कुमारी एवं अन्य की ओर से मामले में याचिका दाखिल की गई थी.
 
हाईकोर्ट
  • कोर्ट ने याचिका सुनवाई के लिए किया स्वीकृत, अगली सुनवाई 27 जनवरी को
  • जेएसएससी की ओर से दस्तावेज वेरीफिकेशन में  उम्मीदवारी रद्द किए जाने का आदेश को एकल पीठ ने किया था निरस्त
  • महिला सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए  निकला था विज्ञापन

Ranchi News : महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले जेएसएससी की अपील से संबंधित मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकृत कर लिया. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2028 निर्धारित की है. खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर लगी रोक को बरकरार रखा है. जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल एवं अधिवक्ता जयप्रकाश ने पक्ष रखा. वहीं, प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स में पक्ष रखा. 

 

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दरअसल, जेएसएससी ने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट द्वारा आकांक्षा कुमारी एवं अन्य के मामले में 15 मई 2026 को पारित आदेश को दाखिल कर हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी है. 

 

दरअसल, महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेज वेरिफिकेशन में त्रुटि निकालकर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी. एकल पीठ ने जेएसएससी द्वारा प्रार्थियों के दस्तावेज वेरिफिकेशन के दौरान उनके उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया था. साथ ही कोर्ट ने प्रार्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल कराने का आदेश जेएसएससी को दिया था. एकल पीठ में आकांक्षा कुमारी एवं अन्य की ओर से मामले में याचिका दाखिल की गई थी. 

 

एकल पीठ में प्रार्थी का क्या था पक्ष

हाईकोर्ट की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि महिला सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए विज्ञापन निकला था. महिला सुपरवाइजर नियुक्ति के विज्ञापन और नियुक्ति नियमावली में यह कहीं नहीं लिखा हुआ था कि अभ्यर्थियों को सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी और होम साइंस में 3 वर्षीय ऑनर्स की डिग्री होना अनिवार्य है.

 

नियुक्ति  के लिए सिर्फ इन तीनों विषयों के साथ ग्रेजुएशन होना जरूरी था. प्रार्थियों ने इन तीनों विषयों में ग्रेजुएशन किया, हालांकि तीन विषय में ऑनर्स डिग्री नहीं लिया है. लेकिन यह तीनों विषयों के साथ ग्रेजुएशन जरूर किया है,  जिसमें उन्होंने दो वर्ष  तक उक्त तीनों विषयों की पढ़ाई जरूर की है.

 

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