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वर्ल्ड हार्ट डे पर रिम्स में वर्कशॉप, एक माह में 570 से ज्यादा केस, युवाओं की संख्या अधिक

Ranchi :   दुनिया भर में 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे ‘डोंट मिस अ बीट’ थीम के साथ मनाया गया. इस अवसर पर रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने भारत में हृदय रोगों की तेजी से बढ़ती समस्या (खासकर युवाओं में) को लेकर गंभीर चिंता जताई, 

 

भारत में 40-45 की उम्र में ही हो रहा हृदय रोग

रिम्स के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत नारायण ने बताया कि अब भारत में दिल की बीमारियां पहले से कहीं कम उम्र में देखने को मिल रही है. उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका में हृदय रोग 60-65 वर्ष की आयु के बाद अधिक देखे जाते हैं. लेकिन भारत में यह बीमारी 40 से 45 वर्ष की आयु में ही दस्तक देने लगी है, जो परिवार और करियर के लिए सबसे महत्वपूर्ण फेज होता है. 

 

धूम्रपान व शराब बन रहे जानलेवा

डॉ हेमंत ने कहा कि वर्तमान जीवनशैली, जिसमें धूम्रपान, अल्कोहल का सेवन, फास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक और अनियमित दिनचर्या शामिल हैं, दिल की बीमारियों को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि अल्कोहल की सीमित मात्रा का सेवन करना भी हानिकारक है.

 

इसी तरह स्मोकिंग और शुगर ड्रिंक का भी सीधा प्रभाव हृदय पर पड़ता है.  डॉ हेमंत ने कहा कि अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक के मामले रहे हैं, तो सतर्कता और भी जरूरी हो जाती है.

 

रिम्स में एक माह में की गईं 570 से अधिक एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी 

रिम्स के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष ने जानकारी दी कि रिम्स में पिछले एक महीने में 570 से अधिक एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की गई हैं. इनमें से 30 से 40 वर्ष के युवा मरीज की संख्या अधिक थी. इनमें लगभग 90% मामलों की प्रमुख वजह धूम्रपान पाई गई.

 

महिलाएं भी खतरे से बाहर नहीं

वर्कशॉप में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. श्रेया ने प्रजेंटेशन के जरिये बताया कि अब महिलाओं में भी हार्ट अटैक का खतरा पुरुषों के बराबर है. हालांकि, जागरूकता की कमी और लक्षणों को नजरअंदाज करने के कारण महिलाओं में समय पर पहचान और इलाज में देरी हो रही है.

 

बचाव के उपाय : जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव ज़रूरी

बता दें कि भारत में हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और देश को दिल की बीमारियों की राजधानी कहा जाने लगा है. चिंता की बात यह है कि अब 30 से 40 साल की उम्र में ही युवाओं को हार्ट अटैक हो रहा है.

 

विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्ते में कम से कम 150 मिनट व्यायाम, सात से नौ घंटे की नींद और नियमित ब्लड प्रेशर व शुगर जांच से हृदय रोगों से बचाव किया जा सकता है.

 

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