Ranchi: विश्व रक्तदाता दिवस के मौके पर झारखंड राज्य स्वैच्छिक रक्तदान संगठन कॉर्डिनेशन कमेटी के राज्य संयोजक और लहू बोलेगा रक्तदान संगठन के संस्थापक नदीम खान ने राज्य में रक्तदान की स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं.
नदीम खान, जो अब तक 38 बार सरकारी ब्लड बैंक में रक्तदान कर चुके हैं, ने कहा कि झारखंड में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अभी भी राज्य में रक्त की जरूरत और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है.
नदीम खान के अनुसार झारखंड में हर साल 10 लाख से अधिक यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है. इसमें करीब 5 लाख यूनिट रक्त रक्त विकारों से पीड़ित मरीजों के लिए और लगभग 5 लाख यूनिट रक्त सड़क दुर्घटनाओं, एनीमिया, गर्भवती महिलाओं तथा अस्पतालों में भर्ती अन्य मरीजों के लिए जरूरी होता है. कहा कि राज्य में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया और हीमोफीलिया जैसी बीमारियों से पीड़ित 11 हजार से अधिक बच्चे और मरीज हैं, जिन्हें हर महीने नियमित रूप से रक्त की जरूरत पड़ती है.
नदीम खान का दावा है कि आवश्यकता के मुकाबले राज्य में करीब 20 प्रतिशत रक्त ही संग्रहित हो पाता है. उन्होंने कहा कि आज भी रक्त संग्रह का बड़ा हिस्सा ब्लड रिप्लेसमेंट डोनर पर निर्भर है, जबकि स्वैच्छिक रक्तदान का प्रतिशत करीब 15 प्रतिशत ही है.
उन्होंने कहा कि राज्य के 24 जिलों में से 21 जिलों में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इन मशीनों की मदद से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और अन्य रक्त घटक तैयार किए जाते हैं, जो थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी हैं.
नदीम खान ने रक्तदाताओं के लिए रिफ्रेशमेंट राशि 25 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये करने, सरकारी और निजी अस्पतालों में नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करने, ब्लड रिप्लेसमेंट डोनर कार्ड व्यवस्था को प्रभावी बनाने और एनएचआरएम मुख्यालय, नामकुम में भी रक्तदान शिविर आयोजित करने की मांग की.
विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर नदीम खान ने लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद की जान बचा सकता है. उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, सामाजिक संगठन और आम लोग मिलकर काम करें तो आने वाले वर्षों में झारखंड रक्तदान के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है.
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