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विश्व सर्प दिवस : झारखंड में 27 प्रजातियों के सांपों का बसेरा

  • बारिश के मौसम में बढ़ता है सर्पदंश का खतरा
  • लेकिन अधिकांश सांप होते हैं विषहीन

Ranchi :   बारिश का मौसम शुरू होते ही झारखंड में सांपों के निकलने और सर्पदंश के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है. जानकारों का मानना है कि डर और अंधविश्वास के कारण हर साल बड़ी संख्या में सांपों को मार दिया जाता है. जबकि अधिकांश सांप इंसानों के लिए बिल्कुल भी खतरनाक नहीं होते हैं.

 

इसके विपरीत वे खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों की संख्या नियंत्रित कर कृषि और पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, झारखंड में सांपों की कुल 27 प्रजातियां पाई जाती हैं.

 

इनमें से केवल छह प्रजातियां ही विषैली हैं. जबकि लगभग 21 प्रजातियां विषहीन हैं और सामान्य परिस्थितियों में इंसानों के लिए जानलेवा नहीं होती हैं. दुनिया में भी सांपों की करीब 3,500 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें लगभग 95 प्रतिशत विषहीन होती हैं.

 

इस वर्ष रांची और आसपास के इलाकों में बसुंधरी (कॉपर हेडेड ट्रिंकेट), बैंडेड करैत, तक्षक नाग और बेबी अल्बिनो रैट स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजातियों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है. इससे क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का भी पता चलता है.

 

झारखंड में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांप

विशेषज्ञों के अनुसार, रांची और आसपास के क्षेत्रों में मुख्य रूप से भारतीय नाग, कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल वाइपर और बम्बू पिट वाइपर जैसे विषैले सांप पाए जाते हैं. इन सांपों के डंसने पर यदि समय पर इलाज न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है.

 

वहीं धामण, चेकर्ड कीलबैक (ढोड), कुकरी स्नेक, वुल्फ स्नेक, लैंड बोआ, ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक, होरहोरा और अजगर जैसी प्रजातियां विषहीन हैं और सामान्यतः इंसानों पर हमला नहीं करती हैं. कैट स्नेक और ब्राउन वाइन स्नेक हल्के विष वाले सांप हैं, जिनका विष आमतौर पर मनुष्यों के लिए घातक नहीं होता है.

 

सर्पदंश के बाद छोटी सी गलती हो सकती है जानलेवा

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय पीड़ित को शांत रखना सबसे जरूरी है.  प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें और बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो. झाड़-फूंक, चीरा लगाने या विष चूसने जैसे पारंपरिक और वैज्ञानिक रूप से गलत तरीकों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती है.


पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं सांप?

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सांप जैव विविधता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है. वे खेतों में चूहों की संख्या नियंत्रित कर फसलों की रक्षा करते हैं और प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं.

 

यही कारण है कि सांपों की कई प्रजातियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है. विशेषज्ञों का कहना है कि सांपों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर और अंधविश्वास से दूर रहकर न केवल मानव जीवन की रक्षा की जा सकती है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता को भी सुरक्षित रखा जा सकता है.

 

 

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