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Ranchi News: 25 साल बाद एक मंच पर जुटे जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्यकार शोधार्थी और विद्यार्थी

मोरहाबादी स्थित दीक्षांत मंडप में शनिवार को एक महत्वपूर्ण अवसर देखने को मिला. दरअसल झारखंड की नौ जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थी व शोधार्थी 25 वर्षों के अंतराल के बाद एक मंच पर एकत्रित हुए हैं. इस कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और अकादमिक शोध से जुड़े अनुभव साझा करेंगे.
 
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Ranchi: मोरहाबादी स्थित दीक्षांत मंडप में शनिवार को एक महत्वपूर्ण अवसर देखने को मिला. दरअसल झारखंड की नौ जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थी व शोधार्थी 25 वर्षों के अंतराल के बाद एक मंच पर एकत्रित हुए हैं. इस कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और अकादमिक शोध से जुड़े अनुभव साझा करेंगे.

 

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कार्यक्रम में जनजातीय भाषाओं के मुंडारी, संथाली, कुड़ुख, हो और खड़िया के साहित्यकार विद्यार्थी,  शोधार्थियों ने भाग ले रहे हैं. वहीं क्षेत्रीय भाषाओं में पंचपरगनिया, कुरमाली, खोरठा और नागपुरी के प्रतिनिधि भी मौजूद है.

 

शोधार्थियों ने इस बात पर विशेष बल दे रहे हैं कि झारखंड की समृद्ध भाषाई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे साझा मंचों का आयोजन किए गए हैं. कनक्लेव में विभिन्न भाषाओं के शोधार्थियों के बीच संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान से भाषाई अध्ययन को नई दिशा और ऐतिहासिक बनाने के उद्देश्य से ये कार्यक्रम हो रहे हैं.

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