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पर्यावरण, स्वास्थ्य व आंतरिक शांति के लिए योग जरूरी

मुख्य अतिथि प्रो. राजेंद्र प्रसाद (NIT जमशेदपुर) ने योग को दैनिक जीवन में अपनाने और पृथ्वी को स्वच्छ बनाए रखने की व्यावहारिक विधियों पर बल दिया.
 

बहरागोड़ा कॉलेज में “हीलिंग अर्थ, हीलिंग सेल्फ” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

Baharagora (Jamshedpur) : बहरागोड़ा कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR) के सौजन्य से “हीलिंग अर्थ, हीलिंग सेल्फ: पर्यावरण, स्वास्थ्य और आंतरिक शांति के लिए योग” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई. आयोजन सचिव डॉ. डुमरेन्द्र राजन ने स्वागत भाषण में कहा कि बहरागोड़ा अध्यात्म व  प्रकृति का मिलन स्थल है. यह स्थान सांख्य दर्शन के पुरुष और प्रकृति  तत्वों का प्रतीक है, जहां चित्रेश्वर महादेव (पुरुष तत्व) और स्वर्णरेखा नदी (प्रकृति तत्व) का संगम होता है. वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य व आंतरिक शांति के लिए योग जरूरी है.

विचारों की बहुलता पर गहन विमर्श

संगोष्ठी में पहले दिन 11 जुलाई को देश के प्रतिष्ठित पटना विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, रांची विश्वविद्यालय के विद्वान प्राध्यापकों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों ने भाग लिया. सभी ने योग, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और आंतरिक शांति पर अपने विचार प्रस्तुत किए. मुख्य अतिथि प्रो. राजेंद्र प्रसाद (NIT जमशेदपुर) ने योग को दैनिक जीवन में अपनाने और पृथ्वी को स्वच्छ बनाए रखने की व्यावहारिक विधियों पर बल दिया.

पटना विवि के प्रो. एनपी तिवारी ने योग की सम्पूर्ण यात्रा और उसके सामाजिक व आध्यात्मिक लाभों पर प्रकाश डाला. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि की डॉ. आभा झा ने युवाओं को योग के लाभों से अवगत कराया. बहरागोड़ा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बालकृष्ण बेहरा ने योग को संस्थान की प्रगति से जोड़ते हुए इसकी महत्ता समझाई. दो समानांतर सत्रों में लगभग 50 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये. सत्र का संचालन प्रो. टी.पी. मंडल (घाटशिला), डॉ. विकास कुमार, डॉ. नरेश कुमार और डॉ. सुरेंद्र मौर्य ने किया. शाम के समापन सत्र में कोल्हान विवि के कलानुशासक डॉ. राजेंद्र भारती ने छात्रों को जीवन में संघर्ष और स्वास्थ्य योग की प्रेरणा दी.

दूसरा दिन पर्यावरण व भारतीय ज्ञान परंपरा पर रहा केंद्रित 

दूसरे दिन 12 जुलाई को संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड के प्रथम स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दिनेश सारंगी शरीक हुए. उन्होंने पर्यावरण व स्वास्थ्य के आपसी संबंध पर अपने विचार साझा किए. मुख्य वक्ता प्रो. सुशीम दुबे (नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय) ने ऑनलाइन माध्यम से व्याख्यान दिया. उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन शैक्षणिक परिवेश पर विस्तृत चर्चा की.

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