Ranchi : भारत में डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम पहल रांची में शुरू हुई. रांची प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तकनीकी विशेषज्ञ सुनील कुमार सिंह ने स्वदेशी सुपर ऐप ZKTOR (जक्टर) का लॉन्च किया. यह ऐप पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित है और इसे बिना किसी सरकारी सहायता या विदेशी निवेश के विकसित किया गया है.
करीब 20 वर्षों तक फिनलैंड के हाई-टेक सेक्टर में काम करने के बाद सुनील कुमार सिंह ने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव को भारत में उपयोग करने का निर्णय लिया. उन्होंने रांची के स्थानीय युवा इंजीनियरों की टीम के साथ मिलकर एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य डेटा सुरक्षा, यूजर की प्राइवेसी और डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करना है.
ZKTOR को पूरी तरह स्व-वित्तपोषित मॉडल पर विकसित किया गया है. कंपनी के अनुसार, न तो किसी विदेशी वेंचर कैपिटल से फंडिंग ली गई और न ही किसी सरकारी योजना पर निर्भरता रखी गई, ताकि ऐप के संचालन और डेटा प्रबंधन पर किसी बाहरी संस्था का प्रभाव न पड़े.
तकनीकी ढांचे की बात करें तो ZKTOR को इसरो के किफायती मॉडल से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया है. यह ऐप विदेशी प्लेटफॉर्म्स की तुलना में लगभग 6 से 8 गुना कम लागत में संचालित होता है, जिसे तकनीकी विशेषज्ञ लंबे समय तक स्थिर और स्वतंत्र संचालन के लिए अहम मान रहे हैं.
महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ZKTOR में विशेष नो-यूआरएल तकनीक विकसित की गई है. इसके तहत यूज़र द्वारा साझा किए गए फोटो या वीडियो का कोई सार्वजनिक लिंक नहीं बनता, जिससे कंटेंट की चोरी, अवैध डाउनलोड और डीपफेक जैसे दुरुपयोग की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है.
डेटा सुरक्षा के लिए ऐप को जीरो नॉलेज सिस्टम पर तैयार किया गया है. इसका मतलब यह है कि यूज़र की निजी चैट, कॉल या डेटा तक कंपनी के मालिक, एडमिन या डेवलपर की भी पहुंच नहीं होती. सभी डेटा भारत स्थित सर्वरों पर ही सुरक्षित रूप से संग्रहित किए जाते हैं.
ZKTOR की टेस्टिंग भारत के अलावा श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में भी की जा चुकी है, जहां से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात कही गई है. कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में दक्षिण एशिया में एक भरोसेमंद और सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी पहचान बनाना है.
इस परियोजना में रांची के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. साथ ही डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को उनकी आय का सीधा 70 प्रतिशत हिस्सा देने की नीति अपनाई गई है, जिसे डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक बड़ा और प्रगतिशील कदम माना जा रहा है.
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