- रांची में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम और रैली
Ranchi News : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर गुरुवार को सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने की. उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों और कर्मचारियों को आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूक रहने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने की शपथ दिलाई.
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कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों से खुलकर बात करने और परेशानी के समय मदद लेने की अपील की गई. इस साल की थीम "Changing the Narrative on Suicide" रखी गई है. इसका मकसद आत्महत्या को लेकर लोगों की सोच और बातचीत के तरीके में सकारात्मक बदलाव लाना है.
कार्यक्रम के बाद स्वास्थ्यकर्मियों और एएनएमटीसी की छात्राओं ने जागरूकता रैली निकाली. रैली के जरिए लोगों को मानसिक तनाव को गंभीरता से लेने और समय पर मदद लेने का संदेश दिया गया.
चुप्पी को बातचीत में बदलना होगा
शशि प्रकाश झा ने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है. उन्होंने कहा कि चुप्पी को बातचीत और निराशा को आशा में बदलने की कोशिश करनी होगी. उन्होंने कहा कि गुस्सा, चिंता और असंतोष मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं. ऐसे में अपनी परेशानियों को परिवार, दोस्तों या डॉक्टर से साझा करना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव से जूझ रहे व्यक्ति को अकेले समस्या का सामना नहीं करना चाहिए. समय पर मदद मिलने से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है.
व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज न करें
जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. सीमा गुप्ता ने कहा कि कई लोग अपनी परेशानी और भावनाएं दूसरों से साझा नहीं कर पाते हैं. ऐसे लोगों को अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करनी चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से भी बचने की सलाह दी.
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, लोगों से दूरी बनाना, लगातार तनाव में रहना या हमेशा निराश दिखना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे समय में उससे बात कर सहयोग देना जरूरी है.
डॉ. ए.आर. मुस्ताफी ने कहा कि जीवन में मुश्किल परिस्थितियां आती रहती हैं. ऐसे समय में सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अवसाद की स्थिति में व्यक्ति के व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों में बदलाव आ सकता है. ऐसे बदलाव दिखने पर परिवार और विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए.
16 सितंबर तक स्कूल-कॉलेजों में होंगे कार्यक्रम
रांची जिले में 10 से 16 सितंबर तक अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. इसमें विद्यार्थियों और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव से निपटने, भावनात्मक सहयोग और संकट के समय मदद लेने की जानकारी दी जाएगी.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में हर साल 7 लाख 20 हजार से अधिक लोगों की मौत आत्महत्या के कारण होती है. 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है.
कार्यक्रम में डॉ. सीमा गुप्ता, डॉ. ए.आर. मुस्ताफी, डॉ. दीपशिखा, डॉ. वीणा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, श्वेता वर्मा, प्रीति, संजय, अभिषेक, सरोज सहित कई पदाधिकारी, कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे.
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