Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में अवैध कोयला कारोबार और पुलिस की भूमिका को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि धनबाद में मामला सिर्फ कोयला चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस और कोयला माफिया के बीच कथित गठजोड़ की भी जांच होनी चाहिए.
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बाबूलाल मरांडी ने कहा कि केंद्र सरकार की एजेंसियों और CISF की ओर से अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज होने के बाद BCCL और उसके अधिकारियों पर दबाव बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि वैध कोयला ले जाने वाले वाहनों को रोकने, मुकदमों में उलझाने और छाताबाद भू-धंसान मामले में BCCL के CMD मनोज अग्रवाल को आरोपी बनाए जाने के पीछे क्या कारण है.
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को केवल संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इन मामलों की पूरी जांच होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है या नहीं.
मरांडी ने BCCL के CMD को कथित तौर पर मिल रही जान से मारने की धमकियों का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि अगर एक सरकारी कंपनी के CMD को कोयला माफिया से खतरा महसूस हो रहा है और उन्हें सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है.
नेता प्रतिपक्ष ने धनबाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून की रक्षा करना है, न कि किसी माफिया के हितों की रक्षा करना.
उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन पर केंद्रीय एजेंसियों की सख्ती के बाद BCCL के वैध खनन और कोयला परिवहन को परेशान करने की कोशिश हो रही है. इसका उद्देश्य अधिकारियों पर दबाव बनाना और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को कमजोर करना हो सकता है.
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि कोयला, बालू और पत्थर के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई से किसी को परेशानी क्यों हो रही है, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए.
उन्होंने धनबाद पुलिस पर लगाए गए माफिया से कथित संबंधों के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच से यह साफ होना चाहिए कि पुलिस कानून के साथ खड़ी है या अवैध कोयला कारोबार के साथ.
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