Ranchi: झारखंड के खनिज संसाधनों और केंद्र सरकार के साथ राज्य के अधिकारों को लेकर सियासत तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा सांसद विद्युत वरण महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर केंद्र सरकार को धमकी देने और राज्य में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है. इसके जवाब में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भाजपा नेताओं पर झारखंड के अधिकारों की आवाज को दबाने का आरोप लगाया है.
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रघुवर दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि झारखंड के कोयला, बालू और पत्थर को कथित तौर पर सिंडिकेट के जरिए लूटने वाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन संसद के दोनों सदनों से पारित संशोधनों के बाद केंद्र सरकार को धमकी दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर झारखंडी मुख्यमंत्री के चाल-चरित्र और कथनी-करनी को समझ चुका है.
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रघुवर दास ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के आंदोलन और मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा को लेकर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठियां चलाई जा रही हैं और मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा को अभेद किले में बदला जा रहा है.
उन्होंने हेमंत सोरेन पर उनके पिता शिबू सोरेन के संघर्ष की विरासत में मुख्यमंत्री बनने की बात कहते हुए कहा कि हेमंत सोरेन ने खुद कभी जनहित का संघर्ष नहीं किया.
वहीं भाजपा सांसद विद्युत वरण महतो ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि झारखंड की बहुमूल्य संपदा कोयला, बालू और पत्थर को सिंडिकेट के जरिए लूट से बचाने के बजाय मुख्यमंत्री केंद्र सरकार को धमकी दे रहे हैं.
विद्युत महतो ने कहा कि झारखंड एक संघीय व्यवस्था का हिस्सा है और संविधान में केंद्र और राज्य सरकारों की शक्तियां स्पष्ट हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी प्रशासनिक विफलताओं और घटते जनाधार को छिपाने के लिए राज्य सरकार केंद्र के साथ टकराव का रास्ता अपना रही है.
उन्होंने छात्रों के आंदोलन को लेकर भी सरकार पर हमला बोला. उनका आरोप है कि जायज अधिकार, रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे युवाओं पर कार्रवाई की जा रही है.
भाजपा नेताओं के इन आरोपों पर JMM ने पलटवार किया है. पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भाजपा अब झामुमो का विरोध करते-करते झारखंडियों का विरोध करने लगी है.
JMM ने कहा कि भाजपा नेताओं के बयानों में झारखंड के अधिकार की हर आवाज को धमकी, अराजकता और राजनीति बताकर खारिज करने की कोशिश दिखाई देती है. पार्टी ने आरोप लगाया कि ऐसी राजनीति से झारखंड के संसाधनों पर राज्य के अधिकार कमजोर होते हैं.
JMM ने कहा कि झारखंड को किसी उपदेश की नहीं, बल्कि अपने हक की गारंटी चाहिए. पार्टी ने साफ किया कि झारखंड अपने खनिज संसाधनों और अधिकारों के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा.
इस तरह खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों को लेकर भाजपा और JMM के बीच बयानबाजी तेज हो गई है. एक ओर भाजपा सरकार पर केंद्र के साथ बेवजह टकराव का आरोप लगा रही है, वहीं JMM इसे झारखंड के अधिकारों की लड़ाई बता रही है.
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