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Bokaro News : तेतुलिया में फर्जी NOC पर वन भूमि की रजिस्ट्री, 1.03 एकड़ को कागजों में दिखाया 103 एकड़

Bokaro News : गिरफ्तार शैलेश सिंह की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीआईडी की अनुसंधानकर्ता डीएसपी सरिता मुर्मू ने 23 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. इसमें जांच एजेंसी ने शैलेश सिंह को कथित तौर पर पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड बताया है.
 
फाइल फोटो

Bokaro News : बोकारो के तेतुलिया मौजा की 103 एकड़ वन भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री मामले में सीआईडी की जांच में दस्तावेजों से छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े के कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं. 

 

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गिरफ्तार शैलेश सिंह की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीआईडी की अनुसंधानकर्ता डीएसपी सरिता मुर्मू ने 23 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. इसमें जांच एजेंसी ने शैलेश सिंह को कथित तौर पर पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड बताया है.

 

सीआईडी के अनुसार, वन भूमि को निजी संपत्ति के तौर पर दिखाने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए. जांच में यह भी सामने आया कि वन विभाग का कथित फर्जी एनओसी तैयार कर शैलेश सिंह ने अपने बेटे की कंपनी मेसर्स उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराई.

 

जमाबंदी में काट-छांट, 1.03 एकड़ को कर दिया 103 एकड़

जांच में सबसे अहम बात जमाबंदी रजिस्टर से जुड़ी सामने आई है. सीआईडी का दावा है कि तेतुलिया मौजा की जमीन के रिकॉर्ड में ओवरराइटिंग और काट-छांट की गई. 1.03 एकड़ जमीन को रिकॉर्ड में कथित तौर पर 103 एकड़ के रूप में दिखाया गया. इसके साथ ही लगान की राशि भी 35 रुपये से घटाकर पांच रुपये किए जाने की बात जांच में सामने आई है.

 

सीआईडी के मुताबिक, शैलेश सिंह ने इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन को जमीन का रैयत बताते हुए उनसे पावर ऑफ अटॉर्नी ली थी. जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों के पास जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं थे और उन्हें जमीन की जानकारी भी नहीं थी. इसके बावजूद इसी आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.

 

कंपनी बनी, 18 दिन बाद जमीन की रजिस्ट्री

जांच में कंपनी गठन और जमीन की रजिस्ट्री के बीच का अंतर भी सामने आया है. सीआईडी के अनुसार, उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड का गठन 23 जनवरी 2021 को शैलेश सिंह के बेटे आयुष कुमार सिंह और कर्मचारी ललन सिंह के नाम पर हुआ था. इसके महज 18 दिन बाद 10 फरवरी 2021 को 74.38 एकड़ जमीन कंपनी के नाम रजिस्ट्री कर दी गई.

 

रजिस्ट्री डीड में जमीन के लिए 10.30 करोड़ रुपये भुगतान का उल्लेख था. इसके लिए आईसीआईसीआई बैंक के चार चेकों का जिक्र किया गया था. सीआईडी के अनुसार, पूछताछ में यह बात सामने आई कि ये चेक कभी भुनाए नहीं गए और कंपनी के खाते में इतनी राशि मौजूद भी नहीं थी.

 

3.40 करोड़ रुपये के लेनदेन का भी जिक्र

सीआईडी की जांच में उमायुष मल्टीकाम के खाते में राजबीर कंस्ट्रक्शन से कुल 3.40 करोड़ रुपये भेजे जाने की बात सामने आई है. जांच के मुताबिक, 8 फरवरी 2021 को 1.80 करोड़, 10 फरवरी को 1.20 करोड़, 4 मार्च को 30 लाख और 26 मार्च को 10 लाख रुपये भेजे गए. जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान सह-आरोपित पुनित कुमार अग्रवाल द्वारा किए जाने की बात भी हलफनामे में कही गई है.

 

जनवरी 2025 से सीआईडी कर रही जांच

इस मामले में सीआईडी थाना में 9 जनवरी 2025 को कांड संख्या 04/2025 दर्ज किया गया था. इससे पहले बोकारो के सेक्टर-12 थाना में 18 मार्च 2024 को कांड संख्या 32/2024 दर्ज हुआ था, जिसे बाद में सीआईडी ने टेकओवर किया.

 

फिलहाल शैलेश सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीआईडी की ओर से दाखिल हलफनामा जांच में सामने आए इन तथ्यों का आधार है. मामले में जमीन के दस्तावेज, जमाबंदी में कथित छेड़छाड़, फर्जी एनओसी और रजिस्ट्री से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है.

 

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