Ranchi News : बिना माता-पिता के बच्चों को सुरक्षित, स्थायी और स्नेहपूर्ण परिवार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया. केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने मंगलवार को झारखंड सरकार और राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA) के सहयोग से रांची में पूर्वी क्षेत्र की पांचवीं क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की. इसमें झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के करीब 175 हितधारकों ने भाग लिया.
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों के दत्तक ग्रहण और गैर-संस्थागत पुनर्वास की प्रक्रिया को आसान बनाना था. इसमें चिकित्सा, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई.
कार्यशाला में CARA की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना सक्सेना, DWCD&SS के सचिव उमाशंकर सिंह, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त कीर्ति श्री, समाज कल्याण निदेशक किरण पासी और JSCPS के निदेशक एवं सदस्य सचिव विजय कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
CARA की सीईओ भावना सक्सेना ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को परिवार उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता बढ़ाने के साथ दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करना जरूरी है. संभावित दत्तक माता-पिता को बेहतर सहयोग देने और बाल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने से अधिक बच्चों को स्थायी परिवार मिल सकता है.
सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि बच्चों को पारिवारिक जीवन, देखभाल और अपनत्व का अवसर देने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं. इसके लिए बाल संरक्षण प्राधिकरणों, स्वास्थ्यकर्मियों और दत्तक ग्रहण एजेंसियों के बीच प्रभावी सहयोग स्थापित करना होगा.
कार्यशाला में स्वास्थ्य संस्थानों और बाल संरक्षण इकाइयों के बीच समन्वय, समय पर चिकित्सकीय आकलन, शिकायत निवारण, संस्थागत क्षमता बढ़ाने तथा प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने पर विचार-विमर्श हुआ. समूह चर्चाओं में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक और समयबद्ध सुझाव भी तैयार किए गए.
इस अवसर पर सफल दत्तक ग्रहण पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाए गए. इसके माध्यम से परिवार-आधारित देखभाल को दिखाया गया है.
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