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Court News : 43 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड के आरोपी को HC से जमानत नहीं

Ranchi News : अभियोजन के अनुसार, मामले की सूचक को पैसों की जरूरत थी. इसका पता सह-आरोपी विकास कुमार उर्फ विकास यादव को था. उसने बैंक ऑफ महाराष्ट्र से लोन दिलाने का भरोसा देकर सूचक से आधार कार्ड और फोटो लिया. 13 नवंबर 2025 को वह सूचक और उसके भाई को बैंक ले गया, जहां बैंक खाता खुलवाया गया. आरोप है कि खाते से संबंधित सिम कार्ड, पासबुक और एटीएम कार्ड बाद में अपने कब्जे में ले लिए गए.
 
हाईकोर्ट
  • कोर्ट ने कहा- आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य, जांच अभी जारी

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने 43 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड के मामले में आरोपी निखिल कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपी की कथित भूमिका और जारी जांच को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ अपराध से जुड़ने के पर्याप्त साक्ष्य हैं. जमानत पर रिहा होने की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

 

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रामगढ़ जिले के साइबर थाना कांड संख्या 05/2026 में आरोपी निखिल कुमार 31 मई 2026 से जेल में बंद है. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी एवं 66डी के तहत मामला दर्ज है. 

 

लोन दिलाने के नाम पर खुलवाया गया था बैंक खाता

अभियोजन के अनुसार, मामले की सूचक को पैसों की जरूरत थी. इसका पता सह-आरोपी विकास कुमार उर्फ विकास यादव को था. उसने बैंक ऑफ महाराष्ट्र से लोन दिलाने का भरोसा देकर सूचक से आधार कार्ड और फोटो लिया. 13 नवंबर 2025 को वह सूचक और उसके भाई को बैंक ले गया, जहां बैंक खाता खुलवाया गया. आरोप है कि खाते से संबंधित सिम कार्ड, पासबुक और एटीएम कार्ड बाद में अपने कब्जे में ले लिए गए.

 

सूचक को बताया गया कि लोन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पासबुक और एटीएम कार्ड लौटा दिए जाएंगे. 13 जनवरी 2026 को बैंक में खाते की स्थिति की जानकारी लेने पर उसे पता चला कि उसके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया गया है और खाता ब्लॉक कर दिया गया है. इस खाते के माध्यम से विभिन्न लोगों से कुल 43 लाख रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है.

 

ओटीपी से ऑनलाइन बैंकिंग सक्रिय करने का आरोप

अभियोजन के अनुसार, जांच में पता चला कि छह दिसंबर 2025 को शाम 7:32 बजे से 7:38 बजे के बीच सूचक के सिम कार्ड का इस्तेमाल निखिल कुमार के मोबाइल फोन में किया गया था. इसी दौरान बैंक खाते की ऑनलाइन बैंकिंग सक्रिय करने के लिए ओटीपी प्राप्त किए जाने की बात सामने आयी. जांच में यह भी पाया गया कि खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की लोकेशन जमशेदपुर में मिल रही थी, जहां एटीएम से कई बार पैसे निकाले जाने के साक्ष्य मिले. इन निकासी से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी जांच में एकत्र किए गए.

 

केस डायरी के अनुसार, विकास कुमार उर्फ विकास यादव ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में निखिल कुमार समेत अन्य आरोपियों की भूमिका का जिक्र किया है. निखिल पर आरोप है कि उसने बैंक खाते, सिम और एटीएम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी करने में सहयोग किया. पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए अपने दोनों मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे. मामले में महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली सहित अन्य स्थानों के लोगों से ठगी की शिकायतें भी सामने आयी हैं.

 

बचाव पक्ष ने दी थी सीमित भूमिका होने की दलील

निखिल कुमार की ओर से अदालत में दलील दी गयी कि सूचक का सिम उसके मोबाइल में केवल एक बार, छह दिसंबर 2025 को ओटीपी प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल हुआ था. जबकि 43 लाख रुपये की कथित ठगी 11 दिसंबर 2025 से तीन जनवरी 2026 के बीच हुई. बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का सूचक से कोई परिचय नहीं है और सह-आरोपी विकास कुमार से दोस्ती तथा फोन पर बातचीत के आधार पर उसे अपराध में शामिल नहीं माना जा सकता. बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है.

 

वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि यह संगठित साइबर अपराध का मामला है. सह-आरोपियों के साथ मिलकर कई बैंक खाताधारकों को ठगी का शिकार बनाया गया और कुल 43 लाख रुपये के लेन-देन की बात सामने आयी है. अभियोजन ने यह भी बताया कि आरोपपत्र दाखिल होने के बावजूद आगे की जांच जारी है.

 

दोनों पक्षों को सुनने और केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी को कथित साइबर अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है. इसी आधार पर अदालत ने निखिल कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी.

 

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