Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के निरसा थाना क्षेत्र के चर्चित दहेज हत्या मामले में गौतम बौरी और उनकी पत्नी चिंता देवी की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया है. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि दोनों के खिलाफ कोई ठोस और विशिष्ट सबूत नहीं है.
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अदालत ने कहा कि "संदेह चाहे कितना भी मजबूत हो, कानूनी सबूत की जगह नहीं ले सकता" और अपीलकर्ताओं को संदेह का लाभ मिलना चाहिए. हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए दोनों को आपराधिक दायित्व से बरी कर दिया. चूंकि दोनों जमानत पर थे, उनके जमानत बांड भी मुक्त कर दिए गए.
क्या था मामला
रिंकू देवी की शादी 2010 में रतन बौरी से हुई थी. मृतका की मां आल्टा देवी के बयान पर 22 मई 2012 की घटना को लेकर निरसा थाना कांड संख्या 141/2012 दर्ज हुआ. आरोप था कि 50 हजार रुपये और मोटरसाइकिल की दहेज मांग पूरी न होने पर सास ने केरोसिन डाला और पति ने माचिस से आग लगा दी. रिंकू को बोकारो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
निचली अदालत (अपर सत्र न्यायाधीश-V, फास्ट ट्रैक कोर्ट, धनबाद) ने 13 सितंबर 2017 को गौतम बौरी और चिंता देवी को धारा 304-बी (दहेज हत्या) के तहत दोषी ठहराते हुए 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी. पति रतन बौरी को 10 साल की सजा मिली थी, जो वह पूरी कर चुका है. इसलिए उसकी अपील 14 सितंबर 2026 को निस्तारित कर दी गई. सास बिजली देवी फरार है और उसका मामला अलग किया गया.
हाईकोर्ट ने कहा- कोई विशिष्ट भूमिका नहीं
गवाहों के अनुसार, दोनों अपीलकर्ताओं पर केवल यह आरोप था कि वे घटना के समय मौजूद थे और बचाने की कोशिश नहीं की. केरोसिन डालने या आग लगाने का आरोप सिर्फ सास और पति पर था.
दहेज मांग और क्रूरता का सबूत नहीं
अदालत ने कहा कि इन दोनों के खिलाफ दहेज मांगने या प्रताड़ना का कोई खास आरोप या साक्ष्य नहीं है. आरोप "अस्पष्ट और सामान्य" है.
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