- HC ने भवनाथपुर के अंचल अधिकारी को छह माह में फैसला करने का दिया निर्देश
Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने गढ़वा जिले के चपरी गांव में सार्वजनिक रास्ते पर कथित अतिक्रमण से जुड़ी जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को भवनाथपुर के अंचल अधिकारी के समक्ष जाने की छूट दी और अंचल अधिकारी को मामले का कानून के अनुसार शीघ्र निपटारा करने का निर्देश दिया.
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क्या है मामला
चपरी गांव (थाना भवनाथपुर, गढ़वा) के निवासी कामेश्वर सिंह ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि खाता संख्या 161, प्लॉट संख्या 572 की लगभग 0.06 एकड़ भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में "गैरमजरूआ आम" (सार्वजनिक रास्ता) दर्ज है, पर निजी प्रतिवादियों ने कब्जा कर चारदीवारी बना ली है. याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह सब सरकारी अधिकारियों, खासकर अनुमंडल पदाधिकारी और अंचल अधिकारी की मिलीभगत से हुआ.
याचिका में अतिक्रमण हटवाने, मनोहर दुसाध के नाम कथित अवैध बंदोबस्ती रद्द करने और अधिकारियों से यह बताने की मांग की गई थी कि किस अधिकार से यह बंदोबस्ती की गई.
कोर्ट ने क्या कहा
खंडपीठ ने कहा कि जमीन सार्वजनिक है या नहीं और अतिक्रमण हुआ है या नहीं, इस पर विवाद है. अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट सामान्यतः तथ्यों के विवादित प्रश्नों पर निर्णय नहीं करता. साथ ही, राज्य ने झारखंड पब्लिक लैंड एन्क्रोचमेंट एक्ट, 2000 ठीक ऐसी ही शिकायतों के लिए बनाया है, जो याचिकाकर्ता के लिए वैकल्पिक और प्रभावी उपाय है.
अधिनियम की धारा 3 के तहत कलेक्टर नोटिस जारी कर अतिक्रमणकारी को कम से कम दो सप्ताह में हाजिर होकर कारण बताने को कहा जा सकता है कि उसे अतिक्रमण से क्यों न रोका जाए या अतिक्रमण क्यों न हटाया जाए. सरकारी पक्ष की ओर से कहा गया कि अंचल अधिकारी इस प्रावधान के तहत सक्षम प्राधिकारी हैं और याचिका मिलने पर सभी पक्षों को सुनकर कानून के अनुसार निर्णय लेंगे.
कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता आदेश अपलोड होने के चार सप्ताह के भीतर दस्तावेजों सहित विस्तृत याचिका अंचल अधिकारी के समक्ष दाखिल करेंगे और निजी प्रतिवादियों को पक्षकार बनाएंगे.
अंचल अधिकारी निजी प्रतिवादियों को नोटिस तामील होने की तारीख से छह माह के भीतर मामले का निपटारा करेंगे.
निजी प्रतिवादियों को शीघ्र नोटिस तामील कराया जाए, क्योंकि कार्यवाही नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए.
सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर अंचल अधिकारी तर्कसंगत आदेश पारित करेंगे और उसे पक्षों को सूचित करेंगे.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने दोनों पक्षों के दावों पर कोई निर्णय नहीं दिया है, इसलिए सभी की दलीलें खुली रहेंगी. मामला बिना किसी जुर्माने के निस्तारित किया गया और लंबित अंतरिम आवेदन भी समाप्त हो गए.
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