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रांची स्मार्ट सिटी की सड़कों पर अंधेरा, स्ट्रीट लाइट ठप

राजधानी रांची को स्मार्ट सिटी की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन हालात यह हैं कि रात होते ही शहर की कई प्रमुख सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं. स्ट्रीट लाइटें कई जगह लगी ही नहीं हैं और जहां लगी हैं, वहां महीनों से उनकी मरम्मत नहीं हुई है. परिणामस्वरूप रात में यातायात और पैदल चलने वालों दोनों के लिए खतरा बढ़ गया है.
 

Ranchi: राजधानी रांची को स्मार्ट सिटी की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन हालात यह हैं कि रात होते ही शहर की कई प्रमुख सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं. स्ट्रीट लाइटें कई जगह लगी ही नहीं हैं और जहां लगी हैं, वहां महीनों से उनकी मरम्मत नहीं हुई है. परिणामस्वरूप रात में यातायात और पैदल चलने वालों दोनों के लिए खतरा बढ़ गया है.

 

  • अरगोड़ा चौक से बिरसा चौक तक जाने वाली सड़क पर ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें बंद हैं. कुछ लाइटें बीच-बीच में जलती हैं, लेकिन 
  • अधिकांश समय सड़क अंधेरे में रहती है.
  • सहजानंद चौक से कडरू रोड पर स्ट्रीट लाइट ही नहीं लगी है. रात के 9 बजे के बाद यह सड़क पूरी तरह सुनसान हो जाती है.
  • नेपाल हाउस जाने वाला मार्ग भी अंधेरे से घिरा रहता है, जिससे वहां आने-जाने वाले लोगों में असुरक्षा का भाव बना रहता है.
  • बड़ा घाघरा डोरंडा रोड और नाकोम डोरंडा पुल पर तो हालात और गंभीर हैं. अंधेरे और सुनसान माहौल के कारण इन स्थानों पर अपराध की संभावना हमेशा बनी रहती है.


स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे में सड़क पर बने गड्ढे और जलभराव दिखाई नहीं देते. बारिश के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं. वहीं, अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो जाते हैं. खासकर सुनसान सड़कों पर अपराध की आशंका लगातार बनी रहती है.


लोगों का कहना है कि सरकार उनसे हर तरह का टैक्स वसूलती है, गाड़ियों पर रोड टैक्स से लेकर बिजली बिल तक, लेकिन सड़क और रोशनी की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान नहीं देती.

 

जब शहर को स्मार्ट सिटी घोषित किया गया था, तो उम्मीद थी कि सड़क और बिजली की बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी. लेकिन यहां हालात उल्टे हो गए हैं. रात को घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है.

 

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य शहर को आधुनिक और सुरक्षित बनाना था, लेकिन रांची में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की यह स्थिति सरकार के दावों पर सवाल खड़ा करती है. नागरिकों का कहना है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही नहीं सुधरीं, तो स्मार्ट सिटी का टैग सिर्फ नाम भर रह गया है.

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