Ranchi News : झारखंड में विधानसभा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर सुनियोजित तरीके से करोड़ों लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है.
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उन्होंने दावा किया कि झारखंड में करीब 1 करोड़ 7 लाख मतदाताओं के नाम को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है. इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है.
गुरुवार को कांग्रेस भवन, रांची में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदीप यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि CBI, ED और RBI जैसी संस्थाओं के बाद अब निर्वाचन व्यवस्था को भी प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है.
जब सरकार को जनता का समर्थन कम होने का एहसास हुआ तो वोट चोरी के अलग-अलग तरीके अपनाए गए. राहुल गांधी ने समय-समय पर इन मुद्दों को उठाया तो SIR को हथियार बनाया गया.
प्रदीप यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में चुनाव आयोग से जुड़े बदलावों के बाद से ही सरकार की मंशा पर सवाल उठते रहे हैं. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के 2 मार्च 2023 के अनुप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की समिति की व्यवस्था दी थी. इसका उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और राजनीतिक प्रभाव को कम करना था.
उन्होंने झारखंड में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे बिना उचित योजना और नियमों का पालन किए संचालित किया जा रहा है. उनके अनुसार, वर्ष 2026 में राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 2,64,63,236 थी. इनमें करीब 44 लाख मतदाताओं को ASDD श्रेणी में रखा गया है.
वहीं, लगभग 63 लाख मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में शामिल किया गया है. इनमें करीब 45 लाख लॉजिकल एनोमली, 15 लाख नो मैपिंग और तीन लाख अन्य श्रेणियों में हैं. इस तरह करीब 1.07 करोड़ मतदाताओं के सामने अपने मताधिकार को सुरक्षित रखने की चुनौती है.
प्रदीप यादव ने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने किसी योग्य मतदाता का नाम नहीं काटे जाने की बात कही थी, लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र के कई ऐसे मतदाताओं के नाम ASDD सूची में डाल दिए गए हैं, जो आज भी संबंधित बूथों पर मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि इनेमरेशन फॉर्म जमा करने के बाद भी कई मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज नहीं हुए हैं.
उन्होंने Form-7 के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया. कहा कि इसके माध्यम से राजनीतिक विरोधियों के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया जा रहा है. उनके मुताबिक, उनके क्षेत्र में गलत तरीके से Form-7 जमा करने के मामले में भाजपा नेताओं के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज हुई हैं. इनमें गोड्डा मुफ्फसिल थाना में FIR संख्या 0154, दिनांक 3 सितंबर 2026 और सरैयाहाट थाना, दुमका में केस संख्या 112/2026, दिनांक 25 सितंबर 2026 शामिल हैं.
प्रदीप यादव ने ऐसे 19 मतदाताओं का विवरण भी साझा किया, जिनके नाम ASDD सूची में शामिल किए जाने का दावा किया गया है. इनमें सरिता देवी, सलामत शेख, ईकरामुत शेख, मो. समीर शेख, नेमत खातून, युसूफ शेख, सहीदा आलम, झगरू राय, नंदलाल राय, दुर्योधन राय और प्यारी देवी समेत अन्य मतदाता शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें एक जीवित मतदाता को मृत घोषित कर दिया गया है.
उन्होंने निर्वाचन व्यवस्था से मांग की कि ASDD के तहत निर्वाचन तंत्र की गलती या लापरवाही से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम निर्वाचक निबंधन नियमावली, 1960 के नियम 21 के तहत बिना Form-6 भरवाए दोबारा मतदाता सूची में दर्ज किए जाएं.
प्रदीप यादव ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार को लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था पर भरोसा है तो उसे राहुल गांधी की बहस की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मताधिकार की सुरक्षा सबसे जरूरी है. संवाददाता सम्मेलन में शहजादा अनवर, राकेश सिन्हा, लाल किशोरनाथ शाहदेव, डॉ. एम. तौसीफ और अख्तर अली उपस्थित थे.
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