- अजय तिर्की को गिरफ्तार करे पुलिस
- पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
- आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे सरकार
- आदिवासियों को सुरक्षा देने में सक्षम नहीं तो सीएम पद से दे इस्तीफा
Ranchi : राजधानी रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसटी मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष समीर उरांव ने आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि निशा भगत आदिवासियों की जमीन, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही थीं. वह जमीन पर अवैध अतिक्रमण और धर्मांतरण के खिलाफ भी मुखर होकर आवाज उठा रही थीं.
समीर उरांव ने आरोप लगाया कि निशा भगत को लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. कुछ दिन पहले अजय तिर्की का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर निशा भगत के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गई थीं. उन्होंने कहा कि निशा भगत ने पिठोरिया थाना में भी अपनी परेशानी बताई थी. लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर गंभीरता नहीं दिखाई.
समीर उरांव ने कहा कि अगर समय रहते पुलिस प्रशासन ने उनकी मदद की होती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी. उन्होंने कहा कि निशा भगत की मौत को केवल आत्महत्या का मामला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और मौत से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है.
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समीर उरांव ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि झारखंड में आदिवासियों के हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों को न्याय नहीं मिल रहा है. समीर उरांव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की.
उन्होंने अजय तिर्की की गिरफ्तारी, संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच और आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. साथ ही आदिवासी समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही. उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार आदिवासियों को सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है तो मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.



