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Hazaribag News : न अक्षम थे, ना बेकार, ना आरोपी, एसपी ने अपने योगदान के 20वें दिन बदल दिए 15 थानेदार

Ranchi/Hazaribag: पुलिस विभाग में थानेदारों का तबादला कोई नई बात नहीं है. समय-समय पर थानेदार बदले जाते रहते हैं. लेकिन सवाल तब उठने लगता है जब थानेदारों को फुटबॉल बना दिया जाता है. यानी न तो वे अक्षम हैं, ना बेकार हैं और ना ही उन पर कोई आरोप है, फिर भी उन्हें हटा दिया जाय. वह भी बिना वजह बताये. किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, ना ही उनकी गलती बतायी गयी.
 
AI द्वारा तैयार सांकेतिक तस्वीर.
  • थानेदारों का तबादला कोई नई बात नहीं है. लेकिन सवाल तब उठने लगता है जब थानेदारों को फुटबॉल बना दिया जाता है.

Ranchi/Hazaribag: पुलिस विभाग में थानेदारों का तबादला कोई नई बात नहीं है. समय-समय पर थानेदार बदले जाते रहते हैं. लेकिन सवाल तब उठने लगता है जब थानेदारों को फुटबॉल बना दिया जाता है. यानी न तो वे अक्षम हैं, ना बेकार हैं और ना ही उन पर कोई आरोप है, फिर भी उन्हें हटा दिया जाय. वह भी बिना वजह बताये. किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, ना ही उनकी गलती बतायी गयी. 

 

आइपीएस अमन कुमार ने 18 अप्रैल को हजारीबाग एसपी के पद पर योगदान किया. योगदान करने के 20वें दिन यानी आठ मई को उन्होंने कुल 39 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला कर दिया. इनमें से 15 पुलिस पदाधिकारी थाना प्रभारी थे. उन्हें बदल दिया गया. उस नियम का भी ध्यान नहीं रखा गया, जिसके तहत थानेदारों की पोस्टिंग दो साल के लिए होती है. कुछ ने इसका काट निकाल लिया है- डीआईजी से अनुमति लेकर. 

 

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तबादले की सूची.

 

हजारीबाग में ओपी, टीओपी मिलाकर कुल 30 थाने हैं. यानी एसपी के योगदान के एक माह बीते भी नहीं और आधे थाना के प्रभारी बदल दिये गये. वह भी बिना कारण बताये. क्या सिर्फ यह वजह थी कि वह पहले जिला में पदस्थापित एसपी के द्वारा पोस्ट किये गये थे. पर, इसमें उनका कसूर क्या है. वह किसी व्यक्ति के आदेश का पालन नहीं करते, कुर्सी का आदेश मानते हैं. एक पुलिस पदाधिकारी ने बताया थोड़ा वक्त दे देते, काम देख लेते, फिर जो उचित समझते. 

 

अब तक आपने पढ़ा....

 

तबादला लिस्ट को देखें तो यह साफ होता है कि उन्हीं थानों के प्रभारी बदले गये, जो या तो हाईवे पर है या फिर कोयला वाले इलाके में. उन्हें क्यों बदला गया और किस कीमत पर बदला गया, यह समझना मुश्किल नहीं है. पुलिस विभाग में सिपाही से लेकर बड़े अफसरों तक इसकी वजह जानते हैं. यह सब देख कर कई सीनियर अफसर माथा पीट रहे हैं.

 

उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में हजारीबाग में अपराध बढ़ गये हैं. इसकी वजह थानेदारों के लिए इलाका का नया होना है. एक साथ बहुत सारे थानों के प्रभारी बदल दिये जाने के बाद ऐसी स्थिति होती है. लेकिन वहां के हालात तो यह है कि अवैध कोयला लदे ट्रक से कुचल कर दो युवकों की मौत हो जाती है और अखबारों में खबर छपती है कारोबारी ने मृतक के परिजनों को 50-50 हजार दिये. लेकिन पुलिस कोयला माफिया प्रभात सिंह, संदीप व अनिल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करती. दुर्घटना की प्राथमिकी भी दर्ज होती है 24 घंटे बाद. 

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