- बहरागोड़ा लैम्प्स के करीब 400 किसानों की राशि का मामला
- 6 नवंबर तक जमा करनी होगी रकम
- सहकारिता निबंधक से मांगी वित्तीय स्थिति की रिपोर्ट
Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने बहरागोड़ा लैम्प्स लिमिटेड में अपनी मेहनत की कमाई जमा करने वाले करीब 400 किसानों की राशि वापस नहीं मिलने के मामले में सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने अंतरिम राहत के तौर पर झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड को 25 लाख रुपये हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया है. यह राशि छह नवंबर 2026 तक जमा करनी होगी. साथ ही, निगम के प्रबंध निदेशक को आदेश के अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है.
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मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. याचिका दिनेश महतो ने दायर की है. इसमें किसानों की ओर से बहरागोड़ा लैम्प्स लिमिटेड के पास जमा राशि वापस दिलाने की मांग की गयी है.
किसानों के 24.64 लाख रुपये लौटाने का मामला
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि करीब 400 किसानों ने अपनी मेहनत की कमाई से कुल 24,64,497 रुपये बहरागोड़ा लैम्प्स में जमा किये थे. अब संस्था यह कहते हुए राशि लौटाने में असमर्थता जता रही है कि उसके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं.
बहरागोड़ा लैम्प्स के अध्यक्ष और सदस्य सचिव की ओर से दाखिल शपथपत्र में किसानों की जमा राशि से इनकार नहीं किया गया है. उनका कहना है कि झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम से कमीशन और अन्य मदों में 1,09,21,705 रुपये बकाया हैं. यह राशि मिलने के बाद किसानों के पैसे लौटा दिये जायेंगे.
सरकारी शपथपत्र में भी 1.28 करोड़ रुपये बकाया होने का उल्लेख
राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र में कहा गया है कि खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम पर बहरागोड़ा लैम्प्स का 1,28,18,108.16 रुपये बकाया है. अधिकारियों के अनुसार, इस राशि के भुगतान के लिए कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है. इसके कारण संस्था आर्थिक संकट का सामना कर रही है और किसानों की जमा राशि वापस नहीं कर पा रही है.
सरकारी शपथपत्र में किसानों की कुल बकाया राशि 38,62,722.91 रुपये बतायी गयी है. इसमें यह भी कहा गया है कि लैम्प्स को बकाया राशि मिलने पर राज्य सरकार किसानों को उनकी जमा रकम वापस दिलाने के लिए निगरानी करेगी.
परिवहन भुगतान पर निगम के जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं
खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम ने अपने जवाब में कहा कि धान के परिवहन के लिए भुगतान सीधे ट्रांसपोर्टरों को किया जाता है, लैम्प्स के माध्यम से नहीं. इसलिए परिवहन मद में लैम्प्स की ओर से खर्च किये जाने की बात समझ में नहीं आती.
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और राज्य सरकार के शपथपत्र पर गौर करते हुए प्रथम दृष्टया माना कि निगम पर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया होने के दावे को समर्थन मिलता है. ट्रांसपोर्टरों को भुगतान किये जाने संबंधी निगम का बचाव अदालत को प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं लगा.
सहकारिता निबंधक को संस्था की संपत्ति और कर्मचारियों की जानकारी जुटाने का निर्देश
हाईकोर्ट ने सहकारी समितियों के निबंधक को बहरागोड़ा लैम्प्स के कार्यालय का दौरा कर उसकी वित्तीय स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है. निबंधक को संस्था में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या, चल-अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय तथ्यों की जानकारी जुटाकर छह नवंबर तक विस्तृत शपथपत्र दाखिल करना होगा.
अदालत ने बहरागोड़ा लैम्प्स के अध्यक्ष और सदस्य सचिव को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है. सहयोग नहीं करने या आदेश के अनुपालन में बाधा डालने पर अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी भी दी गयी है.
कोर्ट की अनुमति के बिना नहीं निकलेगी जमा राशि
अदालत ने स्पष्ट किया कि निगम द्वारा जमा किये जाने वाले 25 लाख रुपये हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के नाम से रजिस्ट्री में जमा होंगे. अदालत की अनुमति के बिना यह राशि किसी भी पक्ष को नहीं दी जायेगी. निगम को अपने बकाये की स्थिति और लैम्प्स को कमीशन की राशि का भुगतान नहीं किये जाने के कारणों पर विस्तृत शपथपत्र भी दाखिल करना होगा.
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