- 583 दिन की देरी से दायर HEC की अपील को किया खारिज
- हाईकोर्ट सख्त, कहा- कर्मचारियों के बच्चों को और परेशानी होगी
Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड) को बड़ा झटका देते हुए 583 दिनों की देरी से दायर अपील खारिज कर दी है. एचईसी ने अपील दायर करने में हुई देरी के लिए अपनी खराब आर्थिक स्थिति का हवाला दिया था.
इसे भी पढ़ें...
कंपनी ने दलील दी थी कि उसकी आर्थिक हालत बेहद खराब है. वह कर्मचारियों को वेतन देने और उन्हें बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी असमर्थ है. कर्मचारियों की स्थिति इतनी खराब है कि वे अपने बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पा रहे हैं.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि कंपनी की आर्थिक बदहाली और अपील दायर करने में हुई देरी के बीच कोई संबंध नहीं है. आर्थिक परेशानी का सामान्य हवाला 583 दिनों की देरी को माफ करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता.
खंडपीठ की टिप्पणी
खंडपीठ ने टिप्पणी की, “एचईसी की यह अपील उस जमीन पर बने स्कूल भवन को तोड़ने से संबंधित है, जिसे कंपनी ने प्रतिवादियों को लीज पर दिया था. यदि स्कूल भवन तोड़ा जाता है, तो वहां पढ़ने वाले एचईसी कर्मचारियों के बच्चों को और परेशानी का सामना करना पड़ेगा.”
लीज में गलत जानकारी देने का आरोप
एचईसी की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि कंपनी ने जिस जमीन को लीज पर दिया था, उसके संबंध में प्रतिवादी संस्था ने गलत जानकारी दी थी. कंपनी का कहना था कि मूल लीजधारी संस्था स्वामी सहजानंद सरस्वती समिति थी, जबकि लीज समझौता झारखंड स्वामी सहजानंद सरस्वती समिति के साथ किया गया. एचईसी ने आरोप लगाया कि संस्था ने खुद को मूल लीजधारी बताकर गलत प्रस्तुति दी थी.
हालांकि, खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर विचार करना आवश्यक नहीं है. अदालत ने एकल पीठ के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि नये लीज डीड में स्पष्ट उल्लेख था कि झारखंड स्वामी सहजानंद सरस्वती समिति के साथ पहले कोई लीज समझौता नहीं हुआ था. इसके बावजूद एचईसी ने इस तथ्य की जानकारी रहते हुए आपसी सहमति से तय शर्तों पर नया लीज समझौता किया था. एकल पीठ ने भी इसी आधार पर एचईसी की गलत बयानी संबंधी दलील को स्वीकार नहीं किया था.
देरी का ठोस कारण नहीं बता सकी कंपनी
खंडपीठ ने कहा कि अपील दायर करने में हुई 583 दिनों की अत्यधिक देरी का आवेदन में कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है. कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पाने और आर्थिक संकट जैसी सामान्य परिस्थितियां निर्धारित समयसीमा में अपील दायर नहीं करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकतीं. इस पर अदालत ने देरी माफी के आवेदन को खारिज कर दिया. इसके परिणामस्वरूप एचईसी की मुख्य अपील भी खारिज हो गयी. हालांकि, अदालत ने मामले में कोई हर्जाना नहीं लगाया.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

