- पर्यटन सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश
- रामगढ़ डीसी व पर्यटन विभाग सचिव हुए हाजिर
Ranchi : रजरप्पा मंदिर (रामगढ़) के पुनरुद्धार से जुड़े संजीव कुमार सिंह की अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में रामगढ़ डीसी और पर्यटन विभाग सचिव हाजिर हुए.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पर्यटन सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने को कहा है कि रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार के लिए तैयार की गई डीपीआर पर आगे क्या कार्रवाई हुई और इसके लिए फंड किस मद से आएंगे. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर निर्धारित की है.
इससे पहले पर्यटन सचिव की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रजरप्पा मंदिर पुनरुद्धार के लिए बजट की राशि ज्यादा है, इसलिए इसकी संचिका विभागीय मंत्री को भेजी गई है. इसके बाद कोर्ट ने दोनों अधिकारियों (रामगढ़ डीसी व पर्यटन विभाग सचिव) की सशरीर उपस्थिति से छूट प्रदान करते हुए अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट को सहयोग करने को कहा है.
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा. बता दें कि रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए 102 करोड़ का डीपीआर तैयार किया गया है.
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दरअसल हाईकोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में कहा था कि वर्ष 2023 में एक जनहित याचिका में मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के संदर्भ में आदेश पारित किया गया था. अदालत ने कहा था कि मंदिर के निकट स्थित भैरवी नदी तट पर सुरक्षा के अभाव में कई लोगों की मौत हो रही है. ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन जरूरी है, ताकि वहां सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके.
बता दें कि प्रार्थी ने संजीव कुमार सिंह ने अवमानना याचिका दाखिल कर झारखंड हाईकोर्ट द्वारा एक याचिका में 11 अगस्त 2023 को परित आदेश का अनुपालन कराने का आग्रह किया है. परित आदेश में हाईकोर्ट ने झारखंड सरकार, पर्यटन विभाग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ जिला प्रशासन को 10 अनिवार्य निर्देश जारी किए थे.
इन निर्देशों में मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाटों का निर्माण, वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालयों की व्यवस्था, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सीय सुविधाएं सुनिश्चित करना, अतिक्रमण हटाना, नदी का चौड़ीकरण आदि शामिल हैं.



