Search

 
 
 

11 साल तक चतरा में जमे रेंजर के सेवा विस्तार में हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी तो नहीं !

दक्षिणी वन प्रमंडल अंतर्गत चतरा में रेंजर सूर्यभूषण कुमार को दोबारा सेवा विस्तार देने की विभागीय अनुशंसा अब गंभीर विवाद का रूप लेती जा रही है. करीब 11 वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित इस रेंजर को फिर से एक्सटेंशन देने की पहल ने न केवल विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह मामला अब न्यायिक टिप्पणी के आलोक में भी संवेदनशील बन गया है.
 
  • रिटायर्ड कर्मियों को बार-बार सेवा विस्तार नहीं, समय पर बहाली जरूरी : हाईकोर्ट
  • टिप्पणी : सेवा विस्तार देना किसी भी संस्था के स्वस्थ विकास के लिए उचित नहीं
  • चतरा वन प्रमंडल में नियमों पर सवाल
  • रेंजर को दोबारा एक्सटेंशन की अनुशंसा से बढ़ा विवाद

Chatra :  दक्षिणी वन प्रमंडल अंतर्गत चतरा में रेंजर सूर्यभूषण कुमार को दोबारा सेवा विस्तार देने की विभागीय अनुशंसा अब गंभीर विवाद का रूप लेती जा रही है. करीब 11 वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित इस रेंजर को फिर से एक्सटेंशन देने की पहल ने न केवल विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह मामला अब न्यायिक टिप्पणी के आलोक में भी संवेदनशील बन गया है.

 

हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट में सेवानिवृत्त वन कर्मियों को सेवा विस्तार देने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस आनंद सेन ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया था. अदालत ने दो एसीएफ अधिकारियों की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि “सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बार-बार सेवा विस्तार देना किसी भी संस्था के स्वस्थ विकास के लिए उचित नहीं है.” 

 

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि “सरकार को अपने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की तिथि पहले से ज्ञात होती है, इसलिए रिक्ति उत्पन्न होने से पहले ही बहाली प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए. सेवा विस्तार कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता.” 

 

अदालत ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी को सेवा विस्तार देने का निर्देश नहीं दे सकती. इसी पृष्ठभूमि में चतरा वन प्रमंडल का मामला और अधिक गंभीर हो गया है. विभागीय अधिकारियों द्वारा रेंजर सूर्यभूषण कुमार को पुनः सेवा विस्तार देने की अनुशंसा को कई लोग हाईकोर्ट की भावना के विपरीत मान रहे हैं. इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विभाग नियमों और न्यायिक निर्देशों की अनदेखी कर रहा है.

 

स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर विरोध भी तेज हो रहा है. सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक इस निर्णय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि लंबे समय तक एक ही पद पर जमे रहना न केवल प्रशासनिक संतुलन को प्रभावित करता है, बल्कि इससे भ्रष्टाचार की आशंकाएं भी बढ़ती हैं.

 

फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या हाई कोर्ट की टिप्पणी के अनुरूप कोई ठोस निर्णय लिया जाता है.

 

पहले आपने पढ़ा...

हार्ट पेसेंट रेंजर की सिफारिश पर DFO का अजूबा तर्क, फिटनेस नहीं कार्य क्षमता के आधार पर हुई अनुशंसा

कुछ वर्ष पूर्व हार्ट का ऑपरेशन कराकर स्टेंट लगवाने वाले रेंजर को दोबारा सेवा विस्तार देने की अनुशंसा पर डीएफओ मुकेश कुमार का बयान अब नए विवाद को जन्म दे रहा है. उन्होंने कहा कि सेवा विस्तार मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर नहीं, बल्कि कार्य क्षमता को देखते हुए किया गया है.

 

DFO के इस बयान के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. लोग पूछ रहे हैं कि जिस रेंजर के हृदय में स्टेंट लगा है, उसकी शारीरिक क्षमता को नजरअंदाज कर जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में ड्यूटी के लिए उपयुक्त कैसे माना जा सकता है?

 

स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि वन प्रमंडल पदाधिकारी का यह निर्णय न केवल संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है, बल्कि विभागीय मानकों और सुरक्षा पहलुओं की भी अनदेखी करता है.

 

अब इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है. क्योंकि चिकित्सकों के अनुसार भी गंभीर हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति या हार्ट का ऑपरेशन कराने वाला शख्स किसी भी परिस्थिति में जंगल-पहाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में ड्यूटी करने के लिए सक्षम नहीं माना जा सकता.

 

मेडिकल साइंस भी हृदय रोगियों को भारी भरकम कार्य करने और ज्यादा पैदल चलने की मनाही करता है. बहरहाल चतरा वन विभाग का यह मामला अब अपने आप में पहेली बनकर रह गया है जो भविष्य में किसी बड़े विवाद को न सिर्फ जन्म दे सकता है, बल्कि विभाग और इसके वरीय अधिकारियों के परेशानी का सबब भी बन सकता है...!

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही