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हाईकोर्ट का फैसला: 10 सहायक अभियंताओं की सेवाएं होंगी नियमित

Ranchi News : राज्य सरकार और JSRRDA ने कहा कि नियुक्ति संविदा पर थी और नियुक्ति पत्र में ही नियमितीकरण का दावा न करने की शर्त थी. साथ ही, याचिकाकर्ता एक योजना (PMGSY) में काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता.
 
हाईकोर्ट

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने ग्रामीण सड़क परियोजना में संविदा पर कार्यरत 10 सहायक अभियंताओं (Assistant Engineers) की सेवाओं को नियमित करने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने पैरवी की.

 

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क्या है मामला

अंजनी कुमार समेत 10 याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 22 जुलाई 2012 के विज्ञापन के तहत झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (JSRRDA) में हुई थी. 50 पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी कर 2013 में इन्हें नियुक्ति पत्र दिए गए. नियुक्ति संविदा आधार पर थी, लेकिन करीब 13 वर्षों से ये लगातार काम कर रहे थे.

 

इनका कार्यकाल समय-समय पर बढ़ाया गया और 7वें वेतन आयोग का लाभ भी दिया गया. नियमितीकरण की मांग पर 19 नवंबर 2024 को दिया गया प्रतिवेदन खारिज होने पर इन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.


राज्य सरकार और JSRRDA ने कहा कि नियुक्ति संविदा पर थी और नियुक्ति पत्र में ही नियमितीकरण का दावा न करने की शर्त थी. साथ ही, याचिकाकर्ता एक योजना (PMGSY) में काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता. 

 

कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता 10 वर्ष से अधिक समय से काम कर रहे हैं, विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के जरिए नियुक्त हुए, योग्यता रखते हैं और नियमित सहायक अभियंताओं जैसा ही काम कर रहे हैं.

 

वेतन पुनरीक्षण का लाभ मिलना इस बात का संकेत है कि वे स्वीकृत रिक्त पदों पर कार्यरत हैं. कोर्ट के अनुसार, नियुक्ति वास्तव में स्थायी प्रकृति की थी, जिसे संविदा का रंग दे दिया गया.

 

सरकार ने जिस भोला नाथ बनाम झारखंड राज्य के खंडपीठ फैसले का हवाला दिया था, उसे सुप्रीम कोर्ट 30 जनवरी 2026 को रद्द कर चुका है. कोर्ट ने सरकार की दलील को "पूरी तरह भ्रामक" बताया.


हाईकोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की सेवाएं 10 वर्ष पूरे होने की तिथि से नियमित की जाएं और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सभी परिणामी लाभ दिए जाएं. यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के 10 सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी. मामले में कोई जुर्माना नहीं लगाया गया.

 

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