Dhanbad News : जिले में प्रतिबंधित लॉटरी का कारोबार कथित तौर पर खुलेआम चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस की चुप्पी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मैथन से लेकर बरोरा और कोलियरी इलाकों तक अवैध लॉटरी का नेटवर्क सक्रिय होने की चर्चा है. सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस की कथित मिलीभगत और संरक्षण के कारण कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं.
सूत्रों के अनुसार, यह धंधा अब केवल पान दुकानों और गुमटियों तक सीमित नहीं है. मोबाइल फोन और WhatsApp के जरिए नंबर बुक किए जा रहे हैं. एजेंटों के माध्यम से टिकट ग्राहकों के घर और दुकानों तक पहुंचाने की कथित व्यवस्था है. यानी पूरा नेटवर्क इस तरह संचालित किया जा रहा है कि ग्राहक को सामने आकर टिकट खरीदने की जरूरत तक नहीं पड़ती.
बरोरा में टिकट छपने का भी दावा
सूत्रों का दावा है कि बरोरा इलाके में अवैध लॉटरी टिकट तैयार किए जाने की गतिविधियां भी चल रही हैं. चिरकुंडा और आसपास के बंद पड़े क्वार्टरों और सुनसान ठिकानों के इस्तेमाल की भी चर्चा है. अगर यह दावा जांच में सही साबित होता है, तो यह मामला सिर्फ अवैध टिकट बेचने का नहीं, बल्कि टिकट तैयार करने वाले संगठित गिरोह का हो सकता है.
मोबाइल बना कारोबार का नया अड्डा
अवैध लॉटरी के कारोबार में अब डिजिटल तरीके का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है. WhatsApp पर नंबर भेजे जाते हैं, रकम का हिसाब मोबाइल पर रखा जाता है और एजेंट के माध्यम से टिकट पहुंचाने का दावा किया जा रहा है. इससे पुलिस के लिए नेटवर्क तक पहुंचना आसान होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है.
पुलिस की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जिले में प्रतिबंधित लॉटरी का कारोबार लगातार चल रहा है, तो स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही. जिन इलाकों में कथित तौर पर एजेंट और पेडलर सक्रिय हैं, वहां कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. क्या पुलिस के स्तर पर सिर्फ छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई कर बड़े नेटवर्क को बचाया जा रहा है. या फिर पूरे कारोबार को किसी स्तर से संरक्षण प्राप्त है.
इन सवालों की जांच जरूरी है. खासकर उन पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए, जिनके थाना क्षेत्र में कथित तौर पर लंबे समय से यह कारोबार चलने की बात कही जा रही है.
हालांकि पुलिस की मिलीभगत के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अवैध लॉटरी के नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और पुलिस की भूमिका महज लापरवाही तक सीमित है या इसके पीछे किसी तरह का संरक्षण भी है.
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