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साड़ी पहन नंगे पैर दौड़ने वाली कविता से जयराम ने फोन पर की बात, बोले-दीदी आपमें मुझे अपनी मां दिखती है

Ramgarh News  : जयराम महतो ने अपने प्रतिनिधियों को कविता महतो के घर भेजा और होमगार्ड भर्ती की तैयारी के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किए. उसे ब्रांडेड जूते, ट्रैक सूट, टी-शर्ट सहित दौड़ से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई. इससे अब कविता को नंगे पैर और साड़ी में दौड़ना नहीं पड़ेगा. वह बेहतर सुविधाओं के साथ अपनी तैयारी जारी रख सकेंगी.
 
धावक कविता
  •  पति की मौत के बाद बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही कविता
  • मजदूरी के साथ होमगार्ड भर्ती की तैयारी में भी है जुटी 
  • जयराम ने प्रतिनिधियों को भेजकर उपलब्ध कराया दौड़ने का सामान 

Ramgarh News  : रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड की रहने वाली ‘साड़ी वाली धावक’ कविता महतो इन दिनों अपने संघर्ष, मेहनत और हौसले को लेकर चर्चा में हैं. कविता के संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद डुमरी विधायक जयराम महतो ने उन्हें फोन कर उनका हाल जाना.

 

बातचीत के दौरान उन्होंने कविता से कहा कि दीदी आपमें मुझे अपनी मां दिखती है. जयराम महतो ने कविता की हिम्मत और संघर्ष की भी सराहना की और उसे हरसंभव मदद का भरोसा दिया. (साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ी कविता देवी, हालात से हारने के बजाय हौसलों से लिख रही नयी कहानी)

 

प्रतिनिधियों को भेजकर उपलब्ध कराया दौड़ का सामान 

जयराम महतो ने अपने प्रतिनिधियों को कविता महतो के घर भेजा और होमगार्ड भर्ती की तैयारी के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किए. उसे ब्रांडेड जूते, ट्रैक सूट, टी-शर्ट सहित दौड़ से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई. इससे अब कविता को नंगे पैर और साड़ी में दौड़ना नहीं पड़ेगा. वह बेहतर सुविधाओं के साथ अपनी तैयारी जारी रख सकेंगी. 

 

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होमगार्ड भर्ती के लिए दौड़ 6 मिनट में किया पूरा

गौरतलब है कि पति की मौत के बाद दो छोटे बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहीं कविता आर्थिक तंगी के बावजूद होमगार्ड भर्ती की तैयारी में जुटी हैं. जूते और ट्रैक सूट तक खरीदने के पैसे नहीं होने के कारण वह साड़ी पहनकर नंगे पैर दौड़ने का अभ्यास करती हैं.

 

कविता की मेहनत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि होमगार्ड भर्ती के लिए निर्धारित दौड़ उन्होंने करीब 6 मिनट में पूरी कर अपनी जबरदस्त इच्छाशक्ति और मेहनत का परिचय दिया. वह रोजाना सुबह करीब चार बजे उठकर दौड़ने की तैयारी करती है. इसके बाद घर के कामकाज के साथ मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है.

 

पति की मौत के बाद बढ़ा जिम्मेदारियों का बोझ 

जानकारी के अनुसार, कविता के पति दीपक महतो गुजरात में मजदूरी करते थे. बीमारी के दौरान उनके इलाज में परिवार को काफी खर्च करना पड़ा. लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. पति की मौत के करीब छह महीने बाद कविता के भसुर का भी बीमारी के कारण निधन हो गया. इलाज के दौरान लिया गया कर्ज भी परिवार पर है. ऐसे कठिन हालात में कविता ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर अपने दो बच्चों और परिवार का सहारा बनी हुई है. 

 

कविता का सपना-होमगार्ड की नौकरी हासिल कर बच्चों का भविष्य संवारना 

कविता की कहानी अब सिर्फ एक महिला के संघर्ष की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह हिम्मत, मातृत्व और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने की मिसाल बन चुकी है. कभी साड़ी में नंगे पैर दौड़ने वाली कविता का सपना है कि वह होमगार्ड की नौकरी हासिल कर अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाएंगी.

 

कविता का संघर्ष यह संदेश देता है कि सुविधाएं भले ही कम हों, लेकिन हौसला मजबूत हो तो मुश्किल रास्तों पर भी मंजिल की ओर कदम बढ़ाए जा सकते हैं. जयराम महतो की ओर से मिले सहयोग ने कविता के इस संघर्ष में एक नई उम्मीद और ऊर्जा जोड़ दी है. 

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