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झारखंड विस : मनोज यादव ने धान खरीद व सिंचाई व्यवस्था पर सरकार को घेरा, थाई मांगुर की अवैध बिक्री का मुद्दा भी उठाया

Ranchi :  झारखंड विधानसभा बजट सत्र में कृषि विभाग के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक मनोज कुमार यादव ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, लेकिन नीतियों के सही क्रियान्वयन के अभाव में किसान परेशान हैं. (झारखंड विधानसभा की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

 

यादव ने कहा कि झारखंड की खेती मुख्य रूप से वर्षा पर आधारित है. सिंचाई की सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को हर साल नुकसान उठाना पड़ता है. हजारीबाग की लोटिया जलाशय योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसका गेट पिछले 10 वर्षों से टूटा हुआ है और बार-बार मांग करने के बावजूद इसकी मरम्मत नहीं कराई गई.

 

विधायक ने कहा कि सिंचाई और कृषि विभाग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है. उन्होंने धान खरीद को लेकर सवाल उठाए. कहा कि 3200 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने का वादा किया गया था, लेकिन किसान बिचौलियों को कम दाम पर धान बेचने को मजबूर हैं.

 

आरोप लगाया कि धान खरीद का लक्ष्य 5 लाख टन से घटाकर 4 लाख टन कर दिया गया है और फरवरी तक 17 से 50 प्रतिशत के बीच ही खरीद हो पाई है. एफआरए केमिकल की कमी और गोदामों के अभाव को भी उन्होंने देरी का कारण बताया.

 

मनोज कुमार यादव ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित बजट का जनवरी तक केवल 25 से 27 प्रतिशत ही खर्च हो सका है. झारखंड राज्य मिलेट मिशन के तहत एक लाख किसानों को अनुदान देने की योजना थी, लेकिन 64 हजार से अधिक आवेदन आने के बाद भी अब तक राशि का भुगतान नहीं हुआ है.

 

 

मत्स्य पालन के मुद्दे पर उन्होंने प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की अवैध बिक्री का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि बंगाल के रास्ते यह मछली झारखंड के कई जिलों में पहुंच रही है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. उन्होंने मछली विपणन के लिए उपलब्ध पिकअप वैन की संख्या में कमी पर भी चिंता जताई.

 

बरही स्थित गौरिया कर्मा कृषि केंद्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1955 में स्थापित यह केंद्र कभी रेड सिंधी गायों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन अब इसकी स्थिति खराब है. उन्होंने वहां बीज उत्पादन केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की मांग की. साथ ही गन्ना खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही.

 

मनोज कुमार यादव ने कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाने से किसानों की स्थिति नहीं सुधरेगी. योजनाओं का सही और समयबद्ध क्रियान्वयन जरूरी है, तभी किसान आत्मनिर्भर बन पाएंगे.

 

 

 

 

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